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आओ मुहम्मद के बारे मे जानें (2 का भाग 2)

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विवरण: शहादा में वर्णित मुहम्मद (उन पर शांति हो) के बारे मे बताने वाले दो-भाग के पाठ का भाग 2

द्वारा Imam Mufti

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 20 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 1,308 (दैनिक औसत: 3)


आवश्यक शर्तें

·आस्था की गवाही

उद्देश्य

·आस्था की गवाही के महत्व को जानना

·आस्था की गवाही के दूसरे भाग का अर्थ जानना।

अरबी शब्द

·शहादा - आस्था की गवाही।

·तहज्जुद - रात में अपनी इच्छा से की जाने वाली प्रार्थना।

उन्होंने बिना किसी अपव्यय या भव्यता के सादा जीवन व्यतीत किया। उन्होंने इस सांसारिक जीवन से मुंह मोड़ लिया। उन्होंने इसे कारागार माना, स्वर्ग नहीं!

यदि वह चाहते तो वह कुछ भी प्राप्त कर सकते थे, क्योंकि उन्हें इस खजाने की चाबियां दी गई थीं, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया।

उन्होंने अपने परलोक के जीवन का कोई हिस्सा इस सांसारिक जीवन के साथ नही बदला। वह जानते थे कि यह एक रास्ता है, स्थायी निवास नहीं। वह अच्छी तरह से समझ गए थे कि यह एक समय काटने वाले स्थान है, न कि आराम की जगह। उन्होंने इसे इसके वास्तविक रूप मे लिया - एक बादल जो जल्द ही ख़त्म हो जाएगा।

फिर भी अल्लाह कहता है कि उसने मुहम्मद को धनी कर दिया:

“और क्या उसने निर्धन पाया, तो धनी नहीं कर दिया??” (क़ुरआन 93:8)

मुहम्मद की पत्नी आयेशा ने कहा:

“एक महीना बीत जाता था और मुहम्मद के घर मे खाना नहीं बनता था। वे दो चीजों पर निर्वाह करते थे - खजूर और पानी। कुछ अंसार [1] जो उसके पड़ोसी थे, अपनी भेड़ों का दूध भेजते थे, जिसे वह पीते और अपने परिवार को देते थे” (सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम)

आयेशा ने कहा कि मुहम्मद (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) के परिवार ने मदीना आने के बाद से जब तक कि उनका निधन नहीं हो गया, कभी तीन दिनों तक लगातार अपनी संतुष्टि के लिए रोटी नहीं खाई, जिसकी अवधि लगभग 10 वर्ष है!

इस सब के बावजूद वह आधी रात को अपने रब के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए तहज्जुद की नमाज़ पढ़ते थे। वह इतनी देर तक नमाज पढ़ते थे कि उनके पैर सूज जाते थे! जब उनसे पूछा गया कि वह अल्लाह की इतनी पूजा क्यों करते हैं, तो उनका जवाब था:

“क्या मैं ईश्वर का आभारी दास न बनूं?” (सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम)

उनके करीबी दोस्तों में से एक उमर उनके भूखे रहने के दिनों को याद करते हुए कहा कि कभी-कभी पैगंबर के पास खाने के लिए पुराने खजूर भी नहीं होते थें!

एक अन्य साथी अब्दुल्ला इब्न मसूद ने कहा कि एक बार जब पैगंबर अपनी नींद से जागे, तो जिस खजूर के पत्तों से बनी चटाई पर वह सोते थे उसके निशान शरीर पर बने हुए थे। इब्न मसूद ने शिकायत की:

“मेरे माता और पिता आप पर क़ुर्बान जाएं! आप हमें आपके लिए कुछ नरम क्यों नहीं बनाने देते जिस पर आप आराम से सो सकें?

उन्होंने जवाब दिया:

‘मुझे इस दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है। मैं इस दुनिया में एक सवार की तरह हूं जो थोड़े समय के लिए पेड़ की छाया के नीचे रुक जाता है और आराम करने के बाद, पेड़ को पीछे छोड़कर अपनी यात्रा फिर से शुरू कर देता है।’” (अल-तिर्मिज़ी)

इतिहास के विभिन्न विजेता खून की नदियां बहाने और खोपड़ियों के पिरामिड बनाने के लिए जाने जाते हैं। पैगंबर मुहम्मद अपनी क्षमा के लिए जाने जाते हैं। आस्था की रक्षा के लिए ईश्वर के मार्ग में युद्ध को छोड़कर उन्होंने कभी अपने ऊपर अन्याय करने वाले किसी भी व्यक्ति से बदला नहीं लिया और किसी को अपने हांथ से नहीं मारा, चाहे वो कोई महिला हो या कोई नौकर।

उनकी क्षमा उस दिन देखी जा सकती थी जब उन्होंने आठ साल के बाद एक विजेता के रूप में मक्का में प्रवेश किया था।

उन्होंने उन लोगों में से कई को माफ कर दिया जिन्होंने उन्हें सताया, और उन्हें और उनके परिवार को तीन साल के लिए निर्वासन में मजबूर किया था, जिन्होंने उन्हें एक पागल, कवि और एक आधिपत्य कहा था। उन्होंने अबू सुफियान को माफ कर दिया जो उन सबसे बुरे लोगों में से एक था जिसने उन्हें सताने की साजिश रची थी, साथ ही उसकी पत्नी हिंद को जिसने एक भयंकर गुलाम वाहशी जो अपने युद्ध कौशल के लिए जाना जाता था उसके द्वारा पैगंबर के मुस्लिम चाचा के शव को क्षत-विक्षत करवाया और उसका कलेजा निकाल के कच्चा खा लिया था। इसकी वजह से इन दोनों ने बाद में इस्लाम स्वीकार कर लिया। ऐसा ईश्वर के सबसे महान और सबसे सच्चे दूत के अलावा और कौन हो सकता है?

मक्का के एक गुलाम वाहशी जिसने इस्लाम के शुरुआती वर्षों में अपने मालिक से पैगंबर के चाचा हमजा की हत्या के बदले में अपनी आजादी हासिल की। जब इस्लाम मक्का पहुंचा तो वह भागकर दूसरे शहर ताइफ चला गया। आखिरकार ताइफ ने भी मुसलमानों के आगे घुटने टेक दिए। उसे पता चला कि मुहम्मद इस्लाम स्वीकार करने वाले को क्षमा कर देते हैं। भले ही उसका अपराध इतना बड़ा था, वाहशी ने हिम्मत जुटाई और उनके पास गया और अपने इस्लाम स्वीकार करने की घोषणा की, और मुहम्मद ने उसे माफ कर दिया! उसने वाहशी के पूर्व मालिक हिंद को भी माफ कर दिया, वह महिला जिसने हमजा के शव को क्षत-विक्षत कर दिया था और इस्लाम के प्रति अपनी बड़ी नफरत के कारण उसका दिल और जिगर चबा गया था!

उसकी क्षमा हब्बर तक भी पहुंची। जब उनकी अपनी बेटी ज़ैनब मक्का से मदीना की ओर पलायन कर रही थी, तो मक्का के मूर्तिपूजकों ने उसे जबरन रोकने की कोशिश की। हब्बर उनमें से एक था। उसने पैगंबर की गर्भवती बेटी को ऊंट से यात्रा करने पर मजबूर किया था। नतीजतन, उसने अपना बच्चा खो दिया! हब्बर अपने अपराध से भागकर ईरान के लिए निकल गया, लेकिन अल्लाह ने उसका दिल पैगंबर की तरफ कर दिया। इसलिए वह महान पैगंबर के सामने पेश हुआ, अपने अपराध को स्वीकार किया, आस्था की गवाही दी, और पैगंबर ने उसे माफ कर दिया!

मुहम्मद ने चांद की तरफ़ उंगली उठा के उसे दो हिस्सों में बांट दिया। उन्होंने एक रात में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा की, सभी पैगंबरो को नमाज पढ़ाई, और फिर अपने ईश्वर से मिलने के लिए सातवे आसमान पर गए। उसने बीमारों और अंधों को ठीक किया। उनके आदेश से शैतान इंसानों के ऊपर से चले गए, अपनी उंगलियों से पानी बहाया, और उनके भोजन को अल्लाह की महिमा करते हुए सुना जा सकता था।

फिर भी वह पुरुषों में सबसे विनम्र थे।

वह जमीन पर बैठते, जमीन पर खाना खाते और जमीन पर सोते थे।

पैगंबर के एक साथी ने बताया कि यदि कोई अजनबी उस सभा में प्रवेश करता जहां पैगंबर मौजूद होते, तो वह पैगंबर की विनम्रता के कारण उनको उनके साथियों मे नहीं पहचान पाता था।

उनके नौकर अनस ने कसम खा के कहा था कि उसकी नौ साल की नौकरी में, महान पैगंबर ने उसे कभी भी दंडित नहीं किया और न ही उसे किसी भी चीज़ के लिए दोषी ठहराया।

उनके साथ के लोगों ने उन्हें इतना विनम्र बताया कि एक छोटी लड़की भी उनका हाथ पकड़ कर जहां चाहे वहां ले जा सकती थी। वह गरीब बीमार मुसलमानों से मिलने और उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जाते थे। वह कमजोरों की सहायता करने और उनके लिए प्रार्थना करने के लिए कारवां के पीछे रहते थे। वह विधवा या गरीब व्यक्ति, या यहां तक कि एक दास के साथ चलने में भी नहीं हिचकिचाते थे। यहां तक ​​कि उन्होंने दासों के खाने के निमंत्रण को भी कभी नहीं ठुकराया जहां उन्हें खाने के लिए जौ की रोटी के अलावा और कुछ नहीं मिलता था।

वह अपने परिवार के लिए सबसे अच्छे पुरुष थे। आयशा ने उनकी विनम्रता का वर्णन किया:

“वह अपने घर के काम और मदद करने में व्यस्त रहते थे, और जब प्रार्थना का समय आता तो वह वजू करते और प्रार्थना के लिए जाते थे। वह अपनी चप्पल खुद मरम्मत करते और अपने कपड़े खुद सिलते थे। वह एक साधारण इंसान थे...अपनी भेड़ों को दुहना करते, और अपने काम खुद करते थे।” (सहीह अल-बुखारी)

वास्तव में वह अपने परिवार के सभी लोगों में सर्वश्रेष्ठ थे। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि लोग उनसे दूर नहीं रह पाते थे!

वह युद्ध के मैदान में सभी पुरुषों में सबसे बहादुर, सबसे निडर और सबसे साहसी थे। अंसार के शूरवीर अल-बारा ने आश्चर्य से कहा:

“जब युद्ध भयंकर हो गया, तो हमने पैगंबर से सुरक्षा मांगी और हम में से सबसे बहादुर वह थे जिसने युद्ध में उनके साथ कदम रखा।” (सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम)

अरब के बहादुर व्यक्ति और खैबर के विजेता अली ने पैगंबर की वीरता का वर्णन किया:

“आपको मुझे बद्र की लड़ाई के दिन देखना चाहिए था, क्योंकि हमने पैगंबर से सुरक्षा मांगी थी। वह दुश्मन के सबसे करीब थे और उस दिन उन्हें युद्ध का सबसे ज्यादा आनंद आया था!” (शर अल-सुन्नत)

अल्लाह के ऐसे नेक पैगंबर थे जिन्हें हमें खुद से ज्यादा प्यार करना चाहिए और जिन्हें ईश्वर ने वर्णित किया है:

“तुम्हारे लिए ईश्वर के दूत के रूप में उत्तम आदर्श है अनुसरण करने के लिए” (क़ुरआन 33:21)

ईश्वर उनकी नैतिक पूर्णता को बताते हैं:

“नून और शपथ है क़लम की तथा उसकी जिसे वो लिखते हैं।

नहीं है आप (मुहम्मद), अपने पालनहार के अनुग्रह से पागल!

तथा निश्चय प्रतिफल (बदला) है आपके लिए अनन्त। तथा निश्चय ही आप बड़े सुशील हैं।” (क़ुरआन 68:1-4)

उनके बारे में सब कुछ - उनके गुण, चरित्र, बातें और अनुकरणीय जीवन - एक व्यक्ति को विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करता है जैसा कि क़ुरआन घोषित करता है:

“तुम्हारे लिए ईश्वर के दूत के रूप में उत्तम आदर्श है अनुसरण करने के लिए” (क़ुरआन 33:21)



फुटनोट:

[1] अंसार : मदद के लिए आगे आए...पैगंबर द्वारा मदीना में उन मुस्लिम निवासियों को दिया गया एक नाम जिन्होंने मक्का के प्रवासियों (या मुहाजिरून) को स्वीकार किया और उन्हें अपने नए घर में समायोजित होने में मदद की।

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