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नमाज़ - उन्नत (2 का भाग 2)

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विवरण: इस दूसरे भाग मे नमाज़ के अनिवार्य, अनुशंसित और नापसंद कार्यों पर चर्चा होगी।

द्वारा Imam Mufti (© 2015 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 22 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 1,253 (दैनिक औसत: 2)


उद्देश्य

·नमाज़ के वजीबात सीखना।

·नमाज़ के कुछ अनुशंसित कृत्यों को जानना।

·नमाज़ के सात नापसंद कार्यो को जानना।

अरबी शब्द

·नमाज - आस्तिक और अल्लाह के बीच सीधे संबंध को दर्शाने के लिए अरबी का एक शब्द। अधिक विशेष रूप से, इस्लाम में यह औपचारिक पाँच दैनिक प्रार्थनाओं को संदर्भित करता है और पूजा का सबसे महत्वपूर्ण रूप है।

·रुकु - नमाज़ मे झुकने की स्थिति।

·इमाम - नमाज़ पढ़ाने वाला।

·तशह्हुद - नमाज़ मे बैठने की स्थिति मे "अत-तहियातु लिल्लाहि… मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुह" कहना।

·तकबीर - "अल्लाहु अकबर" कहना।

·वाजिब - (बहुवचन: वाजिबात) अनिवार्य।

·सुन्नत - अध्ययन के क्षेत्र के आधार पर सुन्नत शब्द के कई अर्थ हैं, हालांकि आम तौर पर इसका अर्थ है जो कुछ भी पैगंबर ने कहा, किया या करने को कहा।

·रकात - नमाज़ की इकाई।

·सूरह - क़ुरआन का अध्याय।

नमाज़ के वाजीबात (अनिवार्य कृत्य)

Prayers_-_Advanced_part_2._001.jpgये वे कार्य हैं जिन्हें नमाज़ पढ़ते समय करना होता है। यदि कोई वाजिब कार्य जानबूझकर छोड़ देता है, तो नमाज़ अमान्य हो जाती है। हालांकि यदि ये अनजाने में छूट जाये, तो इसकी भरपाई के लिए "भूलने का सज्दा" करना चाहिए। इसे आगे के पाठ में और अधिक विस्तार से कवर किया जाएगा।

नमाज़ के दायित्व निम्नलिखित हैं:

1. एक स्थिति से दूसरी स्थिति मे जाते समय 'अल्लाहु अकबर' कहना

पैगंबर जब भी नीचे झुकते या ऊपर उठते तो हर बार अल्लाहु अकबर कहते थे।[1]

2. झुकते समय (रुकू) के शब्द

एक बार 'सुभा-ना रब्बियल - 'अज़ीम' (महान और परिपूर्ण है मेरा ईश्वर) कहना। इससे अथिक बार कहना एक अनुशंसित कार्य है।

3. रुकु से खड़े होने के शब्द

पैगंबर ने कहा, "जब वह (इमाम) कहे:

समी-अल्लाहु ली-मन हमीदह (अल्लाह उसकी सुनता है जो अल्लाह की प्रशंसा करता है)

तब आप सब कहो:

रब्बना व लकल-हम्द (सभी प्रशंशा और धन्यवाद हमारे ईश्वर के लिए है)।” (सहमत हैं)

जब आप अकेले नमाज़ पढ़ रहे हो, तो ये दोनों चीज़ें आपको ही कहना है। हालांकि जब आप किसी इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहे होते हैं तो आप केवल 'रब्बना व लकल-हम्द' कहना है।

4. सज्दा करते हुए शब्द

'सुभा-ना रब्बियल-अला ' (सर्वोच्च मेरा ईश्वर महान और परिपूर्ण हैं) एक बार कहना। इससे अधिक कहना एक अनुशंसित कार्य है।

5. दो सज्दों के बीच दुआ

एक बार 'रब्बिग-फ़िरली' कहना। इससे अधिक कहना एक अनुशंसित कार्य है।

6. पहला तशह्हुद

पहला तशह्हुद पढ़ना। ये दो रकात से अधिक वाली नमाज़ की पहली "लंबी बैठक" मे पढ़ते हैं।

एक बार, जब पैगंबर पहला तशह्हुद पढ़ना भूल गए, तो उन्होंने नमाज़ को फिर से शुरू नही किया, बल्कि उन्होंने "भूलने का सज्दा" कर के इसकी भरपाई की। इससे पता चलता है कि यह वाजिब कार्य है; यदि यह एक "आवश्यक घटक" होता, तो "भूलने का सज्दा" पर्याप्त नहीं होता।

7. पहला तशह्हुद पढ़ने के लिए बैठना

पहला तशह्हुद पढ़ने के लिए बैठना

नमाज़ के अनुशंसित कार्य

नमाज़ के कुछ अनुशंसित कार्य निम्नलिखित हैं:

1. शुरुआती दुआ

यह केवल पहली रकात मे पढ़ते हैं।

सबसे आम दुआ निम्नलिखित है:

सुबहानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबार-कस्मुका व त’आला जद्दुका व ला इलाहा ग़ैरुक।

(ऐ अल्लाह ! मैं तेरी हम्द (तारीफ) और पाकी व सना बयान करता हूँ और मुझे मालूम है की सिर्फ तेरा ही नाम बरकत वाला है, तेरी शान उम्दा है। तेरे इलावा कोई माबूद नहीं।)

2. अल्लाह में पनाह मांगना

इसे बस पहली रकात मे पढ़ना है,

“अऊजु बिल्लाहि मिनश् शैतारिनर्रजीम”

‘मैं अल्लाह की पनाह मांगता हूं शैतान की बुराई से’

3. 'आमीन' कहना

'अमीन' सूरह अल-फातिहा का हिस्सा नही है, बल्कि एक दुआ है जिसका अर्थ है, "ऐ अल्लाह, स्वीकार करो।

सूरह अल-फातिहा पढ़ने के बाद ये कहा जाता है।

पैगंबर ने कहा, "जब इमाम आमीन कहे, तो आपको भी आमीन कहना चाहिए। इसे स्वर्गदूत भी कहते हैं और यदि यह उनके कहने के साथ मेल खाता है, तो व्यक्ति के पिछले सभी पापों को क्षमा कर दिया जाता है।[2]

4. पहली दो रकातो में सूरह अल-फातिहा पढ़ने के बाद क़ुरआन के एक हिस्से को पढ़ना

आप क़ुरआन के किसी भी हिस्से को पढ़ सकते हैं। उदाहरण के लिए आप सूरह अल-इखलास, सूरह अल-फलक, या सूरह अन-नास जैसे छोटे अध्याय पढ़ सकते हैं।

5. नमाज़ की अंतिम बैठक में पैगंबर पर आशीर्वाद भेजने के बाद दुआ करना

इसे पढ़ सकते हैं:

“अल्लाहुम्मा इन्नी 'अऊज़ोबिका मिन 'अज़ाबिल-क़ब्र, व मिन 'अज़ाबी जहन्नमा, व मिन फ़ितनतिल-महया वल-ममाती, वा मिन शर्री फ़ितनतिल मसी-हिद-दज्जाल”

(ऐ अल्लाह! मैं वास्तव में कब्र की सजा से और नरक की सजा से, और जीवन के परीक्षणों से (अर्थात् इस जीवन के परीक्षणों और प्रलोभन से) और मृत्यु से (अर्थात मृत्यु के समय परीक्षण से या कब्र की सजा से), और मसीह विरोधी बुराई से से आपकी शरण चाहता हूं।[3]

6. हांथो को उठाना

शुरुआती तकबीर कहते समय, झुकते समय, झुककर उठते समय और पहली "लंबी बैठक" (जहां पहला तशह्हुद पढ़ते हैं ) से खड़े होने पर हाथ उठाना।

7. दाहिना हाथ बायें हाथ के ऊपर छाती पर रखना

दाहिना हाथ बायें हाथ के ऊपर छाती पर रखना[4]

8. सज्दा करने के स्थान को देखना

सज्दा करने के स्थान को देखना[5]

9. नमाज़ की समाप्ति पर चेहरे को दाएं और बाएं मोड़ना

'अस-सलामु' अलैकुम व-रहमतुल्लाह' कहते हुए चेहरे को दाईं ओर मोड़ना और इसी तरह बाईं ओर मोड़ना।

नमाज़ में क्या नापसंद है?

नापसंद कार्य बस नापसंद हैं। ये प्रार्थना को अमान्य नहीं करते हैं, लेकिन व्यक्ति को जितना संभव हो सके इनसे बचने की कोशिश करना चाहिए ताकि उसकी नमाज़ का इनाम कम न हो।

1. बिना किसी कारण के नमाज़ में चारों ओर देखना

बिना किसी कारण के चारों ओर देखने से एकाग्रता और फोकस कम हो जाता है। अगर यह किसी जरूरत के लिए है तो इसकी अनुमति है। उदाहरण के लिए, महिला का रोते हुए बच्चे को देखना।

2. कमर पर हाथ रखना

“अल्लाह के दूत ने कमर पर हाथ रखकर नमाज़ पढ़ने को मना किया है।”[6]

3. तब नमाज़ पढ़ना जब भोजन आ गया हो या तैयार हो या जब कोई पेशाब करने या शौच करने की इच्छा को दबा रहा हो

कारण यह है कि ऐसे मामले में कोई व्यक्ति नमाज़ पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता है।

5. हलचल

हलचल नापसंद है क्योंकि यह व्यक्ति को नमाज़ पढ़ने की एकाग्रता से विचलित करता है।

6. आंखें बंद करना

आप अपनी आंखे बंद कर सकते हैं यदि इससे शोर-गुल वाले स्थान पर आपको ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है तो।

7. बाजुओं को जमीन पर सपाट रखना

यह तब होता है जब कोई सजदा कर रहा होता है।



फुटनोट:

[1] तिर्मिज़ी

[2] सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम

[3] सहीह मुस्लिम

[4]हीह अल-बुखारी, मलिक, इब्न खुजैमा

[5] हकीम

[6] सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम

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