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टोटका और ताबीज

विवरण: अतीत और वर्तमान समाजों में प्रचलित टोटका और ताबीज के उपयोग और उनके बारे में सामान्य इस्लामी आदेश की एक आलोचनात्मक जांच।

द्वारा Imam Mufti

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > इस्लामी मान्यताएं > ईश्वर का एक होना (तौहीद)


आवश्यक शर्तें

·       अल्लाह पर विश्वास (2 भाग)।

उद्देश्य

·       आधुनिक समाज में प्रचलित टोटको और ताबीजों को जानना।

·       जंतर, टोटका और ताबीज का सटीक अर्थ जानना।

·       सामान्य ताबीजों के बारे में जानना।

·       पूर्व-इस्लामिक अरब के टोटको और ताबीजों के बारे में जानना।

·       टोटको और ताबीजों पर सामान्य इस्लामी आदेश सीखना।

·       क़ुरआन के टोटकों और ताबीजों पर इस्लामी आदेश जानना।

अरबी शब्द

·      शिर्क - एक ऐसा शब्द जिसका अर्थ है अल्लाह के साथ भागीदारों को जोड़ना, या अल्लाह के अलावा किसी अन्य को दैवीय बताना, या यह विश्वास करना कि अल्लाह के सिवा किसी अन्य में शक्ति है या वो नुकसान या फायदा पहुंचा सकता है।

·       रुक्याह - मंत्र।

हजारों वर्षों से लोगों ने टोटके, ताबीज और जंतर लगाकर सौभाग्य लाने और अपनी संपत्ति से दुर्भाग्य को दूर करने की कोशिश की है। टोटका एक ऐसी चीज़ है जिसके बारे में माना जाता है कि इसमें जादू की शक्ति होती है, जो जादू या मंत्र के समान होती है।[1]  जंतर एक चिन्ह या उत्कीर्ण चरित्र वाली वस्तु है, जो बुराई को रोकने और अच्छा भाग्य लाने के लिए एक टोटके के रूप में इस्तेमाल की जाती है।[2]  ताबीज का उपयोग मनुष्य या उसकी संपत्ति, जैसे घर और मवेशियों को चुड़ैलों, राक्षसों और अन्य शरारती शक्तियों के बुरे प्रभाव से बचाने के लिए या दुर्भाग्य और बीमारी का मुकाबला करने के लिए किया जाता था। ताबीज पूर्वी और पश्चिम जनजातियों और राष्ट्रों में आज भी पाया जाता है। अश्शूरियों और मिस्रियों, यूनानियों और रोमियों, यहूदियों और ईसाइयों ने इस प्राचीन अंधविश्वास को बढ़ावा दिया और आज भी अलग-अलग मात्रा में बढ़ावा दे रहे हैं।[3]  तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद, अंधविश्वास और ताबीज पश्चिमी समाज में फैला हुआ है। पश्चिम में कुछ लोकप्रिय ताबीज हैं:

(1)  घोड़े की नाल। आधुनिक उत्तरी अमेरिका में सबसे आम तौर पर देखा जाने वाला भाग्यशाली वास्तु घोड़े की नाल और उसके प्रतिनिधि मॉडल हैं जो गहने, दीवार पर लटकने वाले और मुद्रित छवियों के रूप में हैं। घोड़े की घिसी-पिटी नाल का सुरक्षात्मक ताबीज के रूप में दरवाजे के ऊपर या बगल में लटकाना यूरोप से शुरू हुआ, इसे अब भी इटली से जर्मनी और ब्रिटेन और स्कैंडिनेविया में घरों, खलिहान और अस्तबलों पर कीलों से बंधा हुआ देखा जा सकता है।

(2)  चार पत्ती वाला तिपतिया घास। चार पत्ती वाला तिपतिया घास उत्तरी अमेरिकी में भाग्यशाली वस्तुओं में सबसे आम है और इसकी छवि सौभाग्यशाली सिक्कों और पोस्टकार्ड पर विशेष रूप से लगाई जाती है।

(3)  विशबोन या "मैरी थॉट।" विशबोन तीसरा सबसे लोकप्रिय अमेरिकी ताबीज है, जो घोड़े की नाल और चार पत्ती वाले तिपतिया घास के बाद आता है। यह मुर्गी या टर्की की छाती के ऊपर की हड्डी है। पक्षी की इस हड्डी को बचा के रखने और चूल्हे पर या आग पर तब तक सुखाने का रिवाज है जब तक कि यह भंगुर न हो जाए। सुखाने के बाद, इसे दो लोगों को दिया जाता है, जो इसे तब तक खींचते हैं जब तक कि यह टूट न जाए, और ऐसा करते समय प्रत्येक एक इच्छा मांगता है। जिस व्यक्ति को विशबोन का "अधिक हिस्सा" मिलता है, उसकी इच्छा "पूरी होती है।" यदि विशबोन बराबर हिस्से में टूट जाए, तो दोनों लोगों की इच्छाएं पूरी होती हैं।

(4)  खरगोश का पैर।

(5)  भाग्यशाली कंगन।

(6)  सौभाग्य के सिक्के या 'पॉकेट पीसेस'।

(7)  द लकी या स्माइलिंग बुद्धा आमतौर पर ओरिएंटल दुकानों और रेस्तरां में पाए जाते हैं।

क्रूसिफिक्स। इस पर जब आशीर्वाद मिलता है, तो इसे एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है।  

 

हिब्रू ताबीज: डेविड पेंडेंट का अंगूर-पत्ता सितारा। इसके प्राचीन उपयोगों में से एक जादुई कबालीवादी प्रतीक के रूप में था।

पूर्व-इस्लामिक अरब में टोटका और ताबीज

अरबी ताबीज (अरबी में तमीमा) मोती या हड्डियों से बना होता है जिसे बच्चे या वयस्क गले में पहनते हैं, या घरों या कारों में लटकाते हैं, ताकि बुराई को दूर किया जा सके - विशेष रूप से बुरी नजर - ​​और कुछ लाभ हो सके। पैगंबर मुहम्मद (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) के समय में अरब के लोग अच्छी किस्मत लाने या दुर्भाग्य को टालने के लिए हाथ के कंगन, चूड़ियां, हार, सीप और इसी तरह के ताबीज पहनते थे।

ताबीज पर इस्लामी आदेश

अल्लाह भौतिक जगत का एकमात्र प्रभु और शासक है। 'ईश्वर' का अर्थ है कि वह निर्माता है और ब्रह्मांड में सभी मामलों को नियंत्रित करता है; आकाश और पृथ्वी का राज्य अनन्य रूप से उसी का है, और वह उनका स्वामी है। अल्लाह ने अकेले बिना कुछ के सब कुछ पैदा किया और सब संरक्षण और निरंतरता के लिए अल्लाह पर ही निर्भर हैं। सभी प्राणियों को बनाए रखने के लिए हर पल उसकी शक्ति की आवश्यकता होती है। स्वर्गदूत, पैगंबर, मनुष्य, और जानवरों और पौधों के राज्य उसके नियंत्रण में हैं। भविष्य क्या है, यह तो केवल अल्लाह ही जानता है। सौभाग्य और दुर्भाग्य केवल अल्लाह की ओर से है।

टोटका, ताबीज, और जंतरों में विश्वास करना अल्लाह के शासन में विश्वास करने का खंडन करता है, इससे आप इन बनाई गई वस्तुओं को अच्छी किस्मत लाने या दुर्भाग्य को दूर करने वाला समझते हैं, जबकि केवल अल्लाह ही अच्छा भाग्य ला सकता है और दुर्भाग्य को दूर टाल सकता है। इसलिए, पैगंबर (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) ने इन अंधविश्वासों का विरोध किया क्योंकि ये अल्लाह की नियति को नहीं बदल सकते और किसी के लिए अच्छा भाग्य नहीं ला सकते हैं, और लोगों को ताबीज के बजाय अपने ईश्वर में दृढ़ विश्वास रखना सिखाया। भले ही ताबीज किसी भी नुकसान को टालने में सक्षम नहीं हैं, ताबीज में विश्वास करने से आमतौर पर समय के साथ लोग मूर्तिपूजा की ओर चले जाते हैं। ऐसा कैथोलिकों के बीच देखा जा सकता है जहां क्रूस, मूर्तियों और संतों के पदक पहने जाते हैं या आशीर्वाद और अच्छे भाग्य के लिए रखे जाते हैं।

जब लोगों ने पैगंबर के समय में इस्लाम अपनाया, तो उन्होंने ताबीज में अपने पुराने विश्वास को कायम रखा। पैगंबर ने उन्हें ऐसा करने के लिए सख्ती से मना किया:

(1)  अल्लाह के दूत (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) ने कहा

‘मंत्र (रुक्याह), ताबीज और टोटका शिर्क हैं।” (अहमद, अबू दाऊद)

(2)  अल्लाह के दूत ने कहा,

“जो भी ताबीज पहने, अल्लाह उसकी ज़रूरत पूरी न करे, और जो भी समुंदरी सीप पहने, अल्लाह उसे शांति न दे।” (अहमद)

(3)  एक समूह अल्लाह के दूत के पास अपनी निष्ठा की प्रतिज्ञा करने के लिए आया। पैगंबर ने उनमें से नौ की निष्ठा को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, "ऐ अल्लाह के दूत, आपने नौ की निष्ठा स्वीकार की, लेकिन इस की नहीं।" पैगंबर ने कहा,

“उसने ताबीज पहन रखा है।”

उस आदमी ने अपनी कमीज में हाथ डाला और ताबीज उतार दिया, तब पैगंबर ने उसकी निष्ठा स्वीकार करते हुए कहा,

‘जिसने भी ताबीज पहना है, उसने शिर्क किया है।” (अहमद)

साथियों ने पैगंबर द्वारा ताबीज पर लगाए गए प्रतिबंध का सख्ती से पालन किया। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के बीच भी इस तरह की प्रथाओं का खुलकर विरोध किया। उदाहरण के लिए, पैगंबर के साथियों में से एक हुदैफा एक बीमार आदमी के पास गए, और उस आदमी की ऊपरी बांह पर एक कंगन देखा और उसे खींच कर तोड़ दिया, फिर छंद पढ़ा,

“और उनमें से अधिक्तर अल्लाह को मानते तो हैं, परन्तु मुश्रिक भी हैं।” (क़ुरआन 12:106)[4]

एक अन्य अवसर पर उन्होंने एक बीमार व्यक्ति की ऊपरी बांह को छुआ और उसमें एक रस्सी का कंगन बंधा हुआ पाया। उस आदमी ने हुदैफा से कहा कि इसमें उसके लिए विशेष रूप से बनाया गया एक मंत्र है, इसलिए हुदैफा ने इसे फाड़ दिया और कहा, 'यदि आप इसके साथ मर जाते, तो मैं आपके अंतिम संस्कार के लिए कभी प्रार्थना नहीं करता।’[5]

एक बार इब्न मसूद ने कहा, "मैंने अल्लाह के दूत को यह कहते सुना,

‘मंत्र (रुक्याह), ताबीज और टोटका शिर्क है।”

इब्न मसूद की पत्नी ज़ैनब ने कहा, "आप ऐसा क्यों कहते हो? अल्लाह की कसम, मेरी आंख बह रही थी और मैं उस यहूदी के पास गई, उसने मेरी आंख के लिए एक मंत्र (एक ताबीज की ओर इशारा करते हुए) दिया, और आंख ठीक हो गई। इब्न मसूद ने उसकी गर्दन से ताबीज छीन लिया और उसे तोड़ दिया। 'निश्चित रूप से, अब्दुल्ला के परिवार को शिर्क की कोई आवश्यकता नहीं है,' उन्होंने कहा ... "यह सिर्फ शैतान का काम था जो ये कर रहा था, और जब (यहूदी) ने मंत्र बोला, तो वह रुक गया। आपको बस इतना कहना था जैसा कि अल्लाह के दूत कहते थे:

‘अज़िब इल-बा'स रब्ब अल-नास इश्फी अंता अल-शाफी ला शिफा' इल्ला शिफा'उका शिफाआन ला युगाज़ीरू सकामन

“ऐ मानव जाति के प्रभु, हानि को दूर करो, और ठीक करो, तुम ठीक करने वाले हो। आपके उपचार के सिवा कोई उपचार नही है, एक ऐसा उपचार जो किस बीमारी को नहीं छोड़ता है।”  (अबू दाउद, इब्न माजा)

ताबीज पहनना शिर्क है क्योंकि, अल्लाह पर भरोसा करने के बजाय, दिल ताबीज से जुड़ जाता है यह मानते हुए कि यह सौभाग्य और प्यार लाएगा, या दुर्भाग्य या बीमारी को दूर करेगा।

क़ुरआन के टोटके और ताबीज पर इस्लामी आदेश

कुछ मुसलमान क़ुरआन को अच्छे भाग्य के लिए या तो अपनी कार में लटकाते हैं, या चाबी के छल्लों में लगाते हैं, या कंगन या हार में लगाकर पहनते हैं। लॉकेट में एक छोटा क़ुरआन भी पहना जाता है। 'अल्लाह', 'बिस्मिल्लाह', 'ला इलाहा इल्लल्लाह', या क़ुरआन के विशिष्ट छंद, जो कभी-कभी छोटा अक्षरों में लिख के पेंडेंट के रूप में पहने जाते हैं या लॉकेट में लगाए जाते हैं। सजावट के लिए इन्हें पहनना जाहिर तौर पर शिर्क नहीं है, लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें सुरक्षा या आशीर्वाद के लिए पहनते हैं। इसलिए, क़ुरआन को अच्छे भाग्य के लिए पहनने की इस प्रथा को निम्नलिखित कारणों से मना किया जाता है:

(i)   यह गैर-क़ुरआनी ताबीज पहनने का कारण बन सकता है जिसे आम लोगों शिर्क मानते है और दोनों के बीच अंतर नहीं कर सकते हैं।

(ii)  शौचालय में अल्लाह का नाम या वचन को पहनना अपमानजनक है और क़ुरआन के ताबीज पहनने वाले व्यक्ति के लिए हर बार शौचालय जाने पर उन्हें निकालना हमेशा संभव नहीं होता है।

(iii) पैगंबर खुद ऐसे ताबीज नहीं पहने थे और न ही अपने परिवार के सदस्यों को सुरक्षा या आशीर्वाद के लिए पहनने को कहा था, इसके बजाय उन्होंने सभी प्रकार के ताबीज के खिलाफ चेतावनी दी थी।

 



फुटनोट:

[1]"टोटका।" एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका प्रीमियम से एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका (http://www.britannica.com/eb/article-9125164)

[2] “जंतर” एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका प्रीमियम से एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका (http://www.britannica.com/eb/article-9071049)

[3] यहूदी विश्वकोश, पृष्ठ 546

[4] इब्न अबी हातिम

[5] इब्न वाकी'

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