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स्वर्ग (2 का भाग 1)

विवरण: क़ुरआन और पैगंबर मुहम्मद (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) के कथनों के संदर्भ में स्वर्ग की एक झलक बताने वाला दो भागों वाला एक पाठ। भाग 1: खुशी की परिभाषा और प्रकार, और एक मुसलमान के व्यवहार और खुशी की भावना को प्रेरित करने में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में स्वर्ग की इच्छा।

द्वारा Imam Mufti

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > इस्लामी मान्यताएं > परलोक

श्रेणी: पाठ > इस्लाम के गुण > मुसलमान होने के लाभ


उद्देश्य

·       खुशी की परिभाषा और प्रकार जानना।

·       यह जानना कि एक मुसलमान को अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करने में स्वर्ग की इच्छा एक महत्वपूर्ण कारक है।

·       एक मामूली भूमिका के माध्यम से स्वर्ग के बागों की प्रकृति से परिचित होना।

अरबी शब्द

·       सुन्नत - अध्ययन के क्षेत्र के आधार पर सुन्नत शब्द के कई अर्थ हैं, हालांकि आम तौर पर इसका अर्थ है जो कुछ भी पैगंबर ने कहा, किया या करने को कहा।

हमें क्या प्रोत्साहित करता है? हम जो काम करते हैं वह क्यों करते हैं? हमें क्या खुशी देता है?

बहुत से लोग उत्तर देंगे कि अधिक सुख और कम दुख मानव खुशी की कुंजी है।

यदि ऐसा है, तो लोग दुख में खुश और सुख मे दुखी कैसे हो सकते हैं? यदि केवल आनंद ही हमें प्रेरित नही करता है, तो क्या चीज करती है? खुशियों भरा जीवन जीने के लिए हमें किन इच्छाओं को पूरा करना चाहिए?

उन अधिकांश लोगो के लिए जो खुशी को आध्यात्मिक के बजाय शारीरिक सुख मे खोजते हैं, उनके लिए यह बहुत ही बुनियादी है: दर्द और चिंता से बचने की इच्छा, रिश्तेदारों के साथ समय बिताने की इच्छा, खाने की इच्छा, यौन संतुष्टि की इच्छा, साहचर्य की इच्छा, और पहचाने जाने की इच्छा, आदि।

ऐसे लोगों के लिए जीवन कठिन हो सकता है, जो सीधे-सीधे ये सवाल उठाता है; वास्तव में यह किसके लिए है? खुशी की तलाश में अक्सर लोग किसी भी प्रकार की आंतरिक शांति प्राप्त करने से चूक जाते हैं। हम सोचते हैं कि उच्च पद प्राप्त करने से और अधिक से अधिक धन, एक बेहतर शरीर, पूर्ण साथी प्राप्त करने से हम स्वतः ही खुश हो जाएंगे। यह एक भ्रम है। लोग भौतिकवादी सपने का पीछा करते हुए इस भ्रम में फंस जाते हैं कि पैसा तब तक खुशियां खरीद सकता है जब तक वे भौतिकवाद की सीमा तक नही पहुंच जाते। पड़ोसियों को प्रभावित करना और अधिक संपत्ति बनाना हमें अपने जीवन में जुनून और गहराई से वंचित कर देती है, जो आधुनिक मनुष्य के विरोधाभास (अधिक उम्र मे आध्यात्मिक भूख) की ओर ले जाती है। 

विरोधाभास क्या है? सीधे शब्दों में कहें तो ये यह है: जैसे-जैसे कुछ भौतिकवादी समाजों के सदस्य अमीर होते गए हैं, वे अपने जीवन से कम संतुष्ट होते गए हैं। दुनिया के इतिहास में किसी भी समाज ने आज के समय के जीवन स्तर का आनंद नहीं लिया है: आय बढ़ रही है, कीमतें स्थिर हैं, बेरोजगारी कम है, जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है; वे पहले से कहीं अधिक स्वतंत्रता और अवसर का आनंद लेते हैं। यहां तक ​​कि इस समय के गरीब भी विश्व मानकों के अनुसार अच्छी तरह से जीते हैं। फिर भी उदाहरण के लिए अमेरिका में 1960 के बाद से तलाक की दर दोगुनी हो गई है, किशोर आत्महत्या तीन गुना हो गई है, हिंसक अपराध चौगुना हो गया है, जेल की आबादी पांच गुना हो गई है, और कुछ अनुमानों के अनुसार 1900 के मुकाबले 2000 में अवसाद की घटनाएं दस गुना बढ़ गई है। अमेरिकी आज 40 साल पहले की तुलना में कम खुश हैं, इस तथ्य के बावजूद कि वे 2.5 गुना ज्यादा पैसा कमाते हैं। हमारे पेट भले ही भरे हों, लेकिन हम आध्यात्मिक रूप से भूखे रह जाते हैं।

यह पता लगाने के लिए कि वास्तव में मानव व्यवहार को क्या प्रेरित करता है, दो प्रकार की खुशी को महत्वपूर्ण है: सुखद खुशी और मूल्य-आधारित खुशी। सुखद खुशी सनसनी पर आधारित आनंद है। जब हम मजाक करते हैं या अपना पसंदीदा खाना खाते हैं, तो हमें खुशी का अनुभव होता है। इस प्रकार की खुशी शायद ही कभी एक समय में कुछ घंटों से अधिक समय तक रहती है।

मूल्य-आधारित खुशी एक भावना है कि हमारे जीवन का अर्थ है और हमें खुद को अल्लाह से जोड़कर अपने अस्तित्व के बड़े उद्देश्य को पूरा करना है। यह हमारे गहरे उद्देश्य और मूल्यों से उपजी संतुष्टि का आध्यात्मिक स्रोत है। क़ुरआन और सुन्नत के मूल्यों में निहित ईश्वर के प्रति जागरूक जीवन जीने वाला एक मुसलमान कामुक सुखों से परे मृत्यु के बाद स्वर्ग मे जाने और नर्क से सुरक्षित रहने की इच्छा से प्रेरित होता है।

इस्लामी मूल्य जो एक व्यक्ति को स्वर्ग की ओर और नर्क से दूर ले जाते हैं, एक मुसलमान के व्यवहार को प्रेरित करने और उसकी खुशी की भावना में योगदान देने में सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। परलोक में स्वर्ग प्राप्त करने की इच्छा अन्य सभी इच्छाओं को छोड़कर सही दिशा दिखा के जीवन को अर्थपूर्ण बनाती है। धन, संपत्ति, ड्रग्स, शराब और सेक्स पर केंद्रित एक खाली जीवनशैली स्वर्ग में जाने की आशा में बदल जाती है, और ईश्वर की रचना के साथ संबंध की भावना, और धन और संपत्ति के बजाय अल्लाह के प्रति समर्पण के जीवन मे बदल जाती है। व्यक्ति अपने साथी मनुष्यों के बदले अल्लाह को प्रसन्न करने पर केंद्रित हो जाता है। याद रखना चाहिए कि स्वर्ग का रास्ता मुश्किलों से भरा होता है।

खुश रहने के लिए भौतिकवादी सपनों से जागें और महसूस करें कि केवल अल्लाह के अलावा कुछ भी मनुष्य को संतुष्ट करने में सक्षम नहीं है!

परम संतुष्टि हमारे अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने में होगी - स्वर्ग इस दुनिया में नहीं, जहां हम यात्रियों और अजनबियों की तरह हैं। स्वर्ग ईश्वर का निवास या आध्यात्मिक अवस्था नहीं है जहां कोई व्यक्ति ईश्वर का हिस्सा बन जाता है, जैसा कि कुछ लोग गलती से सोचते हैं। स्वर्ग आनंद का एक आध्यात्मिक निवास है जिसमें सभी की इंद्रियों को पूरी तरह से तृप्त किया जाएगा। यह विश्वासियों के लिए अनेक प्रकार के भोगों का धाम है, इसके वासियों को तनिक भी कष्ट या दुख का अनुभव नहीं होगा। एक ऐसी जगह जहां अंतत: हर ख्वाहिश पूरी होगी।

इस्लामी बगीचे

स्वर्ग (एक खूबसूरत बगीचा) ने ऐतिहासिक रूप से सुंदरता को प्रेरित किया है, कुछ ऐसा जो खूबसूरत बगीचों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है जो पुरे मुस्लिम शासनकाल में मौजूद थे, जैसे कि फारस, स्पेन और भारत में, आमतौर पर एक तरह से बाहरी दुनिया से पलायन या शांतिपूर्ण अलगाव के रूप में बनाये गए थे। मुस्लिम बगीचों में मुक्त बहने वाली सुंदरता और सुखदायक ध्वनि के लिए वाटरवर्क्स और फव्वारे एक आम समावेश थे। मुस्लिम बगीचों में कृत्रिम सजावटी तत्वों का भी उपयोग किया जाता था, जिसमें कालीन जैसे पार्टर, और कृत्रिम पेड़ और कीमती धातुओं और रत्नों से बने फूल शामिल थे।  

मुसलमानों की पीढ़ियों तक, ये बगीचे एक तरह की पवित्र कला का प्रतिनिधित्व करते थे, जिसका उद्देश्य आगंतुक को ईश्वर के करीब लाना था। आज धरती पर मुस्लिम बगीचे सच्चे स्वर्ग की परछाइयां है। ये बगीचे मानव जाति को स्वर्गीय निवास की याद दिलाते हैं जिसमें धार्मिक लोग जायेंगे।

छतरियों और मंडपों द्वारा छाया प्रदान की जाती है। ऐसी जगह बनाने पर जोर दिया जाता है जो सभी इंद्रियों को शामिल करे। सुगंध मुस्लिम बगीचों की एक सामान्य विशेषता है, और ऐसा करने के लिए जड़ी-बूटियों को तैयार किया गया था। शिक्षण और आराम के लिए एक स्थान बनाया गया था। मुस्लिम बगीचों में कभी भी मूर्तियां, आकृतियों वाले नक्काशीदार पत्थर के फव्वारे या कुछ दर्शाने वाली मूर्तियां नहीं होती हैं। इस्लाम ऐसी छवियों के उपयोग की अनुमति नहीं देता है। कुछ मुस्लिम बगीचे अपनी सुंदरता के लिए इतने प्रसिद्ध हैं कि लोग इसकी शांति का आनंद लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं। इनमें ग्रेनाडा, स्पेन में अलहम्ब्रा पैलेस गार्डन; भारत में जगमंदिर पैलेस गार्डन; और माराकेश, मोरक्को में मेजर एले निवास बाग़ शामिल हैं।

मुसलमानों द्वारा बनाए गए हरे-भरे बगीचे एक सांसारिक स्वर्ग के लिए मानव निर्मित प्रेरणा हैं। बाहरी दुनिया से एकांत में एक गुप्त आश्रय; शांति, ध्यान, और प्रार्थना का स्थान। परलोक में विश्वासियों को क्या मिलेगा उसकी एक मामूली भूमिका।

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