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जिहाद क्या है?

विवरण: यह समझना कि जिहाद क्या है, इसके कितने प्रकार हैं और यह आतंकवाद से कैसे अलग है।

द्वारा NewMuslims.com

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > इस्लामी जीवन शैली, नैतिकता और व्यवहार > सामान्य नैतिकता और व्यवहार


उद्देश्य

·       जिहाद शब्द के भाषाई और इस्लामी अर्थ को समझना।

·       जिहाद के प्रकारों को समझना।

·       यह जानना कि जिहाद कौन कर सकता है।

·       जिहाद और आतंकवाद के बीच का अंतर समझना।

·       आधुनिक समय के विचलित, आतंकवादी समूहों के बारे मे समझना।

अरबी शब्द

·       जिहाद - एक संघर्ष, किसी निश्चित मामले में प्रयास करना, और एक वैध युद्ध को संदर्भित कर सकता है।

पृष्ठभूमि

इस्लाम की शुरुआत हिंसा से नहीं हुई। इसके बजाय, यह मक्का के मूर्तिपूजक-प्रभुत्व वाले शहर शहर में पैगंबर मुहम्मद (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) (610 सीई) द्वारा अल्लाह की पूर्ण एकता की शांतिपूर्ण घोषणा के रूप में शुरू हुआ। कुछ वर्षों के भीतर, कुरैश [1] के अभिजात वर्ग पैगंबर और उनके अनुयायियों को उनके आस्था के लिए सताने लगे। पैगंबर मुहम्मद ने मक्का के उत्तर में लगभग 150 मील की दूरी पर मदीना के नखलिस्तान के आदिवासियों के बीच धर्मांतरण किया, जिन्होंने उनके संदेश को स्वीकार किया। 622 सीई में, पैगंबर मुहम्मद अन्य मुसलमानों के साथ इस नखलिस्तान में बस गए।

जब इस्लाम के पैगंबर मक्का से मदीना गए, तब मूर्तिपूजक कबीला उनके प्रति आक्रामक था। लेकिन पैगंबर ने हमेशा धैर्य और बचाव की रणनीति से उनके हमलों को टाल दिया। हालांकि, कुछ अवसरों पर प्रतिशोध के अलावा कोई अन्य विकल्प मौजूद नहीं था। इसलिए, पैगंबर को कुछ अवसरों पर युद्ध करना पड़ा। यह ऐसी परिस्थितियां थीं जिनके कारण युद्ध से संबंधित छंद सामने आए।

अर्थ

जिहाद। यह शब्द हमारी रोजमर्रा की शब्दावली में आ गया है, जो (अधिकांश गैर-मुसलमानों द्वारा) अनर्गल, अनुचित, कुल युद्ध से जुड़ा हुआ है। लेकिन वास्तव में इसका अर्थ क्या है?

इसका गलत अनुवाद "पवित्र युद्ध" मध्ययुगीन धर्मयुद्ध से जुड़ा है और ईसाइयों की देन है।

अरबी मे, शब्द का शाब्दिक अर्थ "प्रयास करना" या "परिश्रम करना" है, जिसका अर्थ क़ुरआन मे इसके उपयोग के आधार पर, "किसी के धर्म के संबंध में" है।

जिहाद शब्द की उत्पत्ति अरबी मूल के शब्द जीम हे दाल से हुई है, जिसका अर्थ है "प्रयास करना।" इस मूल से व्युत्पन्न अन्य शब्दों में "प्रयास," "श्रम," और "थकान" शामिल है। मूल रूप से जिहाद उत्पीड़न और अत्याचार का सामना करने के लिए धर्म का पालन करने का एक प्रयास है। यह प्रयास अपने दिल की बुराई से लड़ने में, या किसी तानाशाह के सामने खड़े होने में हो सकता है। सैन्य प्रयास को एक विकल्प के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन अंतिम उपाय के रूप में और "तलवार से इस्लाम का प्रसार करने के लिए" नहीं, जैसा कि आजकल के लोग मानने लगे हैं।

जिहाद के प्रकार

पैगंबर के समय से लेकर आज तक इस्लामिक विद्वानों ने जिहाद को चौदह से अधिक अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया है।

पाखंडियों के खिलाफ जिहाद

·       दिल से

·       जुबान से

·       धन से

·       व्यक्ति द्वारा

अविश्वासियों के खिलाफ जिहाद

·       दिल से

·       जुबान से

·       धन से

·       व्यक्ति द्वारा

शैतान के खिलाफ जिहाद

·       शैतान जो किसी व्यक्ति को झूठी इच्छाएं और आस्था में निंदनीय संदेह डालता है उससे लड़ना।

·       भ्रष्ट शौक और इच्छा से लड़ना जो वह एक व्यक्ति की ओर फेंकता है

खुद के लिए जिहाद

·       मार्गदर्शन और धर्म सीखने का प्रयास करना, जिसके बिना इस जीवन में या परलोक में कोई खुशी नहीं है

·       इसे सीखने के बाद उस पर अमल करने का प्रयास करना

·       अल्लाह की ओर बुलाने और किसी ऐसे व्यक्ति को सिखाने का प्रयास करना जो इसे नहीं जानता है

·       अल्लाह की ओर बुलाने की कोशिश में धैर्य के साथ प्रयास करना

एक सशस्त्र या सैन्य संघर्ष के रूप मे जिहाद

सशस्त्र संघर्ष रक्षात्मक या आक्रामक हो सकता है।   

रक्षात्मक जिहाद तब किया जाता है जब मुस्लिम भूमि पर आक्रमण किया जाये और लोगों के जीवन, उनके धन और सम्मान को खतरा हो। इसलिए मुसलमान आत्मरक्षा में हमलावर दुश्मन से मुकाबला करते हैं।    

आक्रामक जिहाद में, इस्लामी शासन की स्थापना का विरोध करने वाले और इस्लाम को लोगों तक पहुंचने से रोकने वाले लोगों से लड़ाई की जाती है। संक्षेप में, यह एक साधन है जिसका उपयोग उत्पीड़न को दूर करने के लिए किया जाता है। इस्लाम सभी मानवजाति के लिए एक दया है और लोगों को पत्थरों और मनुष्यों की पूजा से हटा के एक सच्चे ईश्वर की पूजा में लाने के लिए आया है; संस्कृति, लोगों और राष्ट्रों के उत्पीड़न और अन्याय से बचाकर इस्लाम की समानता और न्याय मे लाने के लिए आया है। एक बार जब इस्लाम लोगों तक पहुंच जाए तो इसे स्वीकार करने मे को बाधा नही रहेगी - इसे स्वीकार या अस्वीकार करना लोगों पर निर्भर है। केवल एक स्थापित सरकार ही युद्ध की घोषणा कर सकती है। दूसरे शब्दों में, व्यक्ति स्वयं प्रार्थना कर सकते हैं और दान दे सकते हैं, लेकिन वे अपनी मर्जी से युद्धों की घोषणा नहीं कर सकते।

अधिकांश इस्लामी कार्य कुछ शर्तों द्वारा ही चलते हैं। युद्ध छेड़ना भी कुछ सिद्धांतों के अधीन है, एक यह कि, जब राज्य युद्ध की घोषणा कर दे, तब भी इसका उद्देश्य केवल सैनिको पर ही होता है। समान्य इंसानो को निशाना बनाना गैरकानूनी होता है। क़ुरआन उन लोगो के साथ युद्ध करने का निर्देश नहीं देता जो युद्ध मे नहीं होते हैं। ऐसे लोगों के साथ दया और न्यायसंगत व्यवहार किया जाना चाहिए। (क़ुरआन 60:8-9).

जिहाद बनाम आतंकवाद

आतंकवाद जिहाद नहीं है और आतंकवादी निम्नलिखित कारणों से पवित्र योद्धा नहीं हैं:

·       इस्लाम विश्वासियों को नागरिकों को धमकाने और उन पर हमला करने का निर्देश नहीं देता है।

·       इस्लाम मुसलमानों को "अविश्वासियों" को बिना किसी कारण मारने और नागरिकों को आतंकित करने का आदेश नहीं देता है।

·       आतंकवादी एक न्यायसंगत जिहाद के लिए इस्लामी मानदंडों से परे जाते हैं और कोई सीमा नहीं मानते हैं, किसी भी हथियार या साधन का उपयोग करते हैं।

·       आतंकवादी एक वैध जिहाद के लक्ष्यों और वैध साधनों के बारे में इस्लामी कानून के नियमों को अस्वीकार करते हैं: कि हिंसा आनुपातिक होनी चाहिए और दुश्मन को पीछे हटाने के लिए केवल आवश्यक मात्रा में बल का उपयोग किया जाना चाहिए, निर्दोष नागरिकों को निशाना नही बनाना चाहिए।

·       शासक या राज्य के प्रमुख द्वारा ही जिहाद घोषित किया जाना चाहिए

आज के समय मे, गुमराह व्यक्तियों और समूहों जैसे अल-कायदा, आईएसआईएस या आईएसआईएल, बोको हरम और अन्य ने इस्लाम के नाम पर आतंकवाद के नाजायज और अपवित्र युद्धों की घोषणा करने का अधिकार जब्त कर लिया है। सभी मान्यता प्राप्त मुस्लिम विद्वानों और इस्लामी संगठनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी हरकतें गलत हैं और इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ हैं।



फुटनोट:

[1] वह जनजाति जिसका मक्का पर प्रभुत्व था।

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