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पवित्रशास्त्र के लोगों के लिए मांस (2 का भाग 2)

विवरण: ये दो पाठ वध किए गए मांस के इस्लामी नियमों और विनियमों और पश्चिमी बूचड़खानों में प्रचलित प्रथाओं पर प्रकाश डालेंगे, और मांस कहां से खरीदें, इसका मार्गदर्शन देंगे।

द्वारा Imam Mufti (© 2015 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > इस्लामी जीवन शैली, नैतिकता और व्यवहार > आहार कानून


उद्देश्य

·       पश्चिम में पोल्ट्री और पशुओं के लिए बूचड़खाने की प्रक्रियाओं और उनसे संबंधित इस्लामी नियमों को समझना।

·       जिस मांस के बारे में यह न पता हो कि उसका वध किसने और कैसे किया, जैसे किसी रेस्तरां मे मिलने वाला मांस, उस मांस पर इस्लामी आदेश समझना।

·       मांस खरीदने के लिए व्यावहारिक सुझाव।

अरबी शब्द

·       शरिया - इस्लामी कानून।

·       हलाल - अनुमेय।

·       हराम - निषिद्ध या वर्जित।

पश्चिमी देशो में बूचड़खाने की प्रक्रिया

पश्चिमी देशो में बूचड़खाने की प्रक्रियाओं के बारे मे बहुत सारे प्रलेखित प्रमाण हैं।

पोल्ट्री प्रक्रिया

·       बांधे रखना:

बूचड़खाने में, पक्षी बिना भोजन या पानी के ट्रकों के अंदर 1 से 9 घंटे या इससे भी अधिक समय तक बंधे रहते हैं। संयंत्र के अंदर, "लाइव-हैंग" क्षेत्र में, उन्हें एक लोहा के रैक में इकठ्ठा कर दिया जाता है जो उन्हें उल्टा करके लटका देते हैं।

·       विद्युत स्थिरीकरण के लिए चोट मारने वाला टैंक:

फिर पक्षियों के सिर और ऊपरी शरीर को "स्टनर" नामक पानी के छींटे मारने वाले टैंक मे डाला जाता है। यह पानी बिजली के संचालन के लिए ठंडा और खारा होता है। इसका उद्देश्य पक्षियों को गतिहीन करना, उन्हें फटने से बचाना और उनके पंखों की मांसपेशियों को पंगु बनाना है ताकि वे आसानी से बाहर निकाले जा सकें। कई बार मशीन खराब हो जाती है और मुर्गे घंटों तक इसी पानी में लटके रह जाते हैं।

·       गर्दन काटना:

"स्टनर" से निकलने के बाद, पक्षियों की गर्दन आंशिक रूप से एक घूर्णन मशीन ब्लेड और/या एक मैनुअल गर्दन कटर द्वारा काट दी जाती है। कई बार धमनियां छूट जाती हैं क्योंकि वे पक्षी के गले में फंस जाती हैं।

·       ब्लीड-आउट टनल और स्केलिंग टैंक:

अभी भी जीवित रहते हैं - उद्योग जानबूझकर पक्षियों को वध प्रक्रिया के दौरान जीवित रखता है ताकि उनके दिल रक्त पंप करना जारी रखें - फिर वे 90 सेकंड के लिए एक ब्लीड आउट सुरंग में उल्टा लटका दिया जाता है ताकि वो रक्त निकलने से मर जाएं, लेकिन लाखों पक्षियों की मृत्यु नहीं होती है, और जब कन्वेयर बेल्ट फर्श के बहुत करीब पहुंच जाता है तो असंख्या पक्षी खून के पूल में डूब जाते हैं। मृत या जीवित पक्षियों को फिर अर्द्ध-उबलता हुआ पानी के टैंकों में गिरा दिया जाता है। 1993 में, अमेरिकी सुविधाओं में 7 अरब पक्षियों का वध किया गया था, जिसमे से 3 मिलियन से अधिक जीवित पक्षियों को उबलते हुए टैंकों में डुबो दिया गया था।[1] एक पूर्व बूचड़खाने के कर्मचारी के अनुसार, जब मुर्गियों को जिंदा उबाला जाता है, तो वे "फड़फड़ाते हैं, चीखते और लात मारते हैं, और उनकी आंखों की पुतलियां उनके सिर से बाहर निकल जाती हैं। वे अक्सर टैंक में इतना संघर्ष करने के बाद दूसरे छोर से टूटी हुई हड्डियों और विकृत और गायब शरीर के अंगों के साथ बाहर आते हैं।"

·       शरिया के दृष्टिकोण से, यह विधि निम्नलिखित कारणों से समस्याग्रस्त है:

(ए)   स्टनिंग करने से पक्षियों की मौत हो सकती है। कुछ अनुमान बताते हैं कि 90% तक मुर्गे बिजली के झटके से मर जाते हैं। अगर ऐसा होता है तो मुर्गे की गर्दन कटने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी होती है और उसके मास को सड़ा हुआ माना जाएगा।

(बी)   गर्दन काटने वाली मशीनों के ब्लेड अक्सर गर्दन को छोड़ देते हैं या इसे आंशिक रूप से काटते हैं। पोल्ट्री उद्योग मे ऐसे मुर्गो का एक विशेष नाम है, 'रेडस्किन्स'। बाद में वे जलती हुई टंकी में मारे जाते हैं। ऐसे मुर्गियों के मास को भी सड़ा हुआ माना जाएगा।

(सी)   जब कोई मशीन गला काट रही हो तो हर मुर्गे के लिए बिस्मिल्लाह पढ़ना संभव नहीं है। ज्यादा से ज्यादा व्यक्ति मशीन शुरू करने से पहले इसे पढ़ सकता है। वध के समय बिस्मिल्लाह पढ़ना पशु के मांस के हलाल होने के लिए अनिवार्य है।

पशु प्रक्रियाएं

पश्चिमी देशो मे वध करने से पहले मवेशियों को 'फीडलॉट' या काउ सिटी में रखा जाता है। उन्हें कम समय में मोटा बनाने के लिए घास की जगह मकई खिलाया जाता है, जो सस्ता होता है। मकई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है, इसलिए उन्हें एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। कुछ सौ एकड़ में 100,000 तक जानवर होते हैं। गायों के पास खड़े होने के लिए बमुश्किल पर्याप्त जगह होती है, वे गोबर में सोती और आराम करती हैं। जब वे फीडलॉट से बूचड़खाने पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनपर लगे गोबर को हटाया जाता है। यह एक कठिन प्रक्रिया है; कुछ गोबर मांस के साथ मिक्स हो जाता है। गोबर में ई-कोलाई और अन्य रोगजनक होते हैं। इसलिए मांस विकिरणित होता है।

अमेरिका में कानून है कि पशुओं को उल्टा लटका कर गला काटने से पहले उन्हें बिजली के झटके, गैस, हथौड़े से सिर पर मारकर या दोनो आंखों के बीच मे स्प्रिंग-लोडेड बोल्ट (जिसे 'कैप्टिव बोल्ट सिस्टम' के रूप में जाना जाता है) मारकर वध करना चाहिए। प्रक्रिया के इस चरण के दौरान केवल दो गले की नसें कटती हैं और अन्नप्रणाली और श्वसन पथ बचा रहता है।

यह एक विशिष्ट प्रक्रिया है: एक व्यक्ति जिसके पास एक शक्तिशाली बंदूक की तरह दिखने वाला हथियार है, जिसे स्टनर कहा जाता है, गाय के मस्तिष्क में आंखों के बीच में एक धातु बोल्ट इंजेक्ट करता है। यह एक मोटी पेंसिल के आकार और लंबाई का होता है। इससे जानवर का दिमागी मौत हो जाता है।

क्या स्टनिंग करने के बाद मुसलमान, यहूदी या ईसाई द्वारा वध किया गया जानवर हलाल है? कुछ मामलों में जानवर निश्चित रूप से वध किये जाने से पहले ही मर जाते हैं जिससे वो हराम हो जाते हैं। जिन विद्वानों ने इनमें से कुछ प्रक्रियाओं को देखा है, उन्हें संदेह है कि आंखों के बीच गोली लगने के बाद जानवर जीवित रहता है या नहीं। कुछ मामलों में, बिजली का झटका और गैसिंग भी श्वासावरोध से निश्चित मृत्यु का कारण बनता है। यह मुस्लिम विशेषज्ञों के लिए जांच का क्षेत्र है। कम से कम जानवरों को इस तरह से स्टनिंग कर के मारना एक संदिग्ध अभ्यास है और यह ध्यान देने योग्य है कि यहूदी ऐसा नहीं करते हैं।

पश्चिमी देशो के किराना स्टोर में बिकने वाले मांस का सेवन निम्नलिखित कारणों से हलाल नहीं माना जा सकता है:

(ए)   वध करने वाले व्यक्ति के धर्म को जानने का कोई तरीका नहीं है, क्योंकि कई लोग बूचड़खानों में काम करते हैं जो हिंदू, सिख, बौद्ध, नास्तिक और ऐसे लोग होते हैं जिनका कोई धर्म नहीं है।

(बी)   यदि बूचड़खाने में काम करने वाले अधिकांश लोग पवित्रशास्त्र के लोगों हैं, तो यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि क्या वध करने वाला सिर्फ एक ईसाई नाम वाला अमेरिकी है, जैसा कि आज पश्चिम में कई लोगों के ईसाई जैसेनाम हैं, लेकिन वे ईसाई नहीं हैं।

(सी)   यदि यह भी मान लिया जाए कि वह व्यक्ति एक ईसाई है, तो बूचड़खानों की प्रक्रियाएं अधिकांश जानवर को हराम या कम से कम संदिग्ध बना देंगे (स्टनिंग किये गए गायों की तरह)।

उपरोक्त विचारों को देखते हुए, मुसलमान को पश्चिमी देशो में किराने की दुकानों से मांस खरीदने की अनुमति नहीं है, जब तक कि यह निश्चित न हो कि जानवर को शरिया मानकों के अनुसार वध किया गया है।

'अदि इब्न हातिम ने बताया: मैंने अल्लाह के दूत से शिकार के बारे में पूछा। उन्होंने कहा: जब तुम अपना तीर चलाओ तो अल्लाह का नाम लो, और यदि तुम्हें लगे की जानवर तीर से मरा है तो खाओ, सिवाय इसके कि जब तुम जानवर को पानी में गिरा हुआ पाओ, क्योंकि इस स्थिति में तुम नहीं जानते कि यह पानी से मरा है या तुम्हारे तीर से।[2]

यह हदीस बताती है: यदि मांस के हलाल और हराम दोनो होने के कुछ संकेत हैं, तो हराम के संकेतों को वरीयता दी जाएगी। इसके अलावा, मांस को अस्वीकार्य माना जायेगा जब तक कि कई न्यायविदों द्वारा उल्लिखित हलाल साबित न हो जाए।

क्या होगा यदि हमे पता न हो कि एक यहूदी या ईसाई द्वारा वध किए गए मांस पर ईश्वर का नाम पढ़ा गया है या नही?

बिना किसी विद्वतापूर्ण विवाद के, ऐसे मामले में इसकी अनुमति है।

मूर्तिपूजकों, हिंदुओं और नास्तिकों द्वारा वध किया गया मांस

विद्वान इस बात से सहमत हैं कि इस तरह का वध किया गया मांस हराम है और इसे खाया नहीं जा सकता।

यदि कोई हिंदू या कोई बहुदेववादी स्वयं मांस का वध नहीं करता है, बल्कि हलाल मांस खरीद कर बेचता है, तो इसे खाने की अनुमति है।

क्या होगा यदि यह पता न हो कि इसे किसने और कैसे मारा, जैसे कि एक रेस्तरां के किराने की दुकान में मिलने वाला मांस?

(i)    यदि यह एक मुस्लिम बहुल देश में मिलता है तो कोई भी बाजार से मांस खरीद सकता है और बिना किसी विद्वानों के विवाद के खा सकता है, भले ही हम उस व्यक्ति के बारे मे न जानते हों जिसने इसे वध किया था या यह शरिया के अनुसार किया गया था। इसका कारण यह है कि मुस्लिम बहुल देश में पाया जाने वाला मांस शरिया द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा करता है।

‘लोगों ने पैगंबर से पूछा कि कुछ लोगों ने मांस दिया है और उन्हें नहीं पता कि इस पर बिस्मिल्लाह पढ़ा गया है या नहीं। पैगंबर ने उन्हें उस पर बिस्मिल्लाह पढ़ने और खाने का निर्देश दिया।’

(ii)   एक ऐसे देश जहां अधिकांश लोग न तो यहूदी हैं और न ही ईसाई, मांस को बाजारों से नहीं खरीदना चाहिए और न ही खाना चाहिए, जब तक कि कोई यह सुनिश्चित न कर ले या उसके पास यह मानने का अच्छा कारण न हो कि यह एक मुस्लिम या यहूदी या ईसाई द्वारा ठीक से वध किया गया है।

(iii)  यदि मांस उस देश में मिलता है जहां हलाल और हराम दोनों मांस पाए जाते हैं, तो संदेह के कारण इसकी अनुमति नहीं है; क्योंकि ऐसे परिदृश्य में जहां हलाल और हराम सह-अस्तित्व में हैं, हराम को वरीयता दी जाती है; इसलिए ऐसे मांस से बचना चाहिए। अधिकांश विद्वानों की यही राय है। यह अदि की हदीस पर आधारित है जिसने पूछा, 'मान लीजिए मैं अपने कुत्ते को शिकार के लिए भेजता हूं लेकिन मुझे वहां एक और कुत्ता दिख जाता है, और मुझे नहीं पता कि किस कुत्ते ने इसे पकड़ा है?' पैगंबर ने जवाब दिया, 'उसे मत खाओ, क्योंकि तुमने अल्लाह का नाम पढ़ कर सिर्फ अपने कुत्ते को भेजा था, दूसरे कुत्ते पर नही।’

(iv)  यदि यह ऐसे स्थान पर पाया जाता है जहां अधिकांश लोग यहूदी और ईसाई हैं, तो मूल शासन मुस्लिम भूमि के समान है क्योंकि उनका मांस मुसलमानों की तरह ही अनुमेय है। लेकिन, जब यह निश्चित रूप से पता हो या यह मानने का अच्छा कारण हो कि वे शरिया द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार वध नहीं करते हैं, तो उनके मांस को खाने की अनुमति नहीं है जब तक कि वध करने के तरीके का पता न लगाया जाये। पश्चिमी देशों में यह प्रमुख मामला है जैसा कि कई विद्वानों द्वारा घोषित किया गया है जो वास्तव में वहां रहते हैं या अपनी यात्राओं के दौरान इस मुद्दे की जांच कर चुके हैं।

व्यावहारिक सुझाव

·       अपने क्षेत्र या पड़ोसी शहरों में हलाल मुस्लिम स्टोर को ऑनलाइन खोजें।

·       हलाल मीट बेचने वाले दुकान के बारे में जानकारी के लिए अपनी स्थानीय मस्जिद से संपर्क करें या मुस्लिम दोस्तों से पूछें।

·       यहूदियों और ईसाइयों द्वारा वध किए गए मांस के संबंध में सावधानी बरतनी चाहिए कि मांस असंसाधित हो। यदि उन्हें संसाधित किया जाता है तो सामग्री के लिए लेबल को पढ़ना चाहिए। कई मामलों में मांस उत्पादों को कोमल बनाये रखने और स्वाद बढ़ाने के लिए उनमे अल्कोहल (रेड वाइन/व्हाइट वाइन) मिलाया जाता है।

·       आप स्थानीय किराना स्टोर से कोशर चिह्नित कच्चा मांस खरीद सकते हैं।

 



फुटनोट:

[1] सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम #94-363, पॉल्ट्री मे वध किया हुआ, चोट से मारा हुआ, और मुर्दा, 6/30/94

[2] सहीह मुस्लिम

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