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पैगंबरो के चमत्कार

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विवरण: चमत्कार क्या है और पैगंबरो के जीवन में इसका क्या स्थान था?

द्वारा Aisha Stacey (© 2015 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 15 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 1,153 (दैनिक औसत: 3)


उद्देश्य:

·चमत्कार की परिभाषा को समझने के लिए।

·पैगंबरो और चमत्कारों के बीच के संबंध को समझना।

·पैगंबरो के चमत्कारों के बारे में और अधिक पढ़ने के लिए पाठक को प्रोत्साहित करना।

अरबी शब्द:

·सुन्नत - अध्ययन के क्षेत्र के आधार पर सुन्नत शब्द के कई अर्थ हैं, हालांकि आम तौर पर इसका अर्थ है जो कुछ भी पैगंबर ने कहा, किया या करने को कहा।

·हदीस - (बहुवचन - हदीसें) यह एक जानकारी या कहानी का एक टुकड़ा है। इस्लाम में यह पैगंबर मुहम्मद और उनके साथियों के कथनों और कार्यों का एक वर्णनात्मक रिकॉर्ड है।

·जिन्न - अल्लाह की एक रचना जो मानवजाति से पहले धुआं रहित आग से बनाई गई थी। उन्हें कभी-कभी आत्मा, बंशी, पोल्टरजिस्ट, प्रेत आदि के रूप में संदर्भित किया जाता है।

·सूरह - क़ुरआन का अध्याय।

·मस्जिद - प्रार्थना स्थल का अरबी शब्द।

·मोजिज़ा- चमत्कार।

·करामत - (बहुवचन: करामात) एक असाधारण मामला या घटना है जो ईश्वर का पालन करने वाले एक आस्तिक के हाथों करवाया जाता है। करामत आमतौर पर केवल उसी को लाभ पहुंचाता है जिसे यह दिया जाता है।

Miracles-of-the-Prophets.jpgDictionary.com चमत्कार को भौतिक दुनिया में एक प्रभाव या असाधारण घटना के रूप में परिभाषित करता है जो सभी ज्ञात मानव या प्राकृतिक शक्तियों से ऊपर होता है और इसका कारण अलौकिक होता है। हालांकि इस्लाम इन असाधारण घटनाओं का श्रेय अल्लाह की शक्ति को देता है। चमत्कार एक आश्चर्यजनक कार्य है जो केवल अल्लाह के सीधे हस्तक्षेप के कारण ही हो सकता है। ये वो घटनाएं हैं जिन्हे पैगंबरो ने किया या ये उनसे संबंधित थी। चमत्कार जादू नही हैं, न ही वे घटनाएं हैं जिन्हें धर्मी लोगों ने किया है। जादू परिभाषा के अनुसार एक चाल या भ्रम है; जबकि, विद्वान धर्मी लोगों द्वारा कभी-कभी की गई अस्पष्टीकृत घटनाओं को करामत कहते हैं।

ईश्वर ने मुख्य रूप से पैगंबरो को मानवजाति का मार्गदर्शन करने के लिए भेजा। वे उत्कृष्ट चरित्र के इंसान थे जिनका लोग अनुकरण कर सकते हैं और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। वे देवता, अर्ध-देवता या संत नहीं थे; वे एक कठिन कार्य करने वाले जिम्मेदार इंसान थे। कई बार उनके पास असाधारण विशेषताएं और गुण थे क्योंकि उन्हें सिर्फ एक अल्लाह की पूजा करने के संदेश फैलाने के लिए अप्रत्याशित परीक्षणों और समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

अल्लाह ने अपने पैगंबरो की सहायता करने के लिए कभी-कभी उन्हें असाधारण शक्ति दी। चमत्कार का अरबी शब्द मोजिज़ा है जिसका अर्थ है कुछ ऐसा अनोखा जिसको नज़रअंदाज़ न किया जा सके। पैगंबरो को दिए गए चमत्कार न केवल अद्वितीय थे, वे उन लोगों के लिए भी प्रासंगिक और समझने योग्य थे जिनके पास उन्हें भेजा गया था। जब उन्होंने एक चमत्कार देखा तो वे समझ गए कि यह एक सामान्य व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकता है।

पैगंबर मूसा के समय में मिस्र की भूमि में जादू और टोना-टोटका बहुत आम था, इसलिए मूसा के चमत्कार, जैसे कि छड़ी को सांप मे बदलना और हाथ चमकना, लोगों को विश्वास दिलाता था कि उन्हें मार्गदर्शन के लिए भेजा गया है। फिरौन के दरबार में जादूगरों के साथ पैगंबर मूसा की मुलाकात जादू और चमत्कार के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है। जब जादूगरों ने सांप छल और भ्रम (जादू) से बनाये थे, लोगो ने देखा कि मूसा ने एक असली सांप उत्पन्न किया है, वे तुरंत समझ गए थे कि यह एक चमत्कार है। इस कारण वे गिर पड़े और अल्लाह को सजदा किया, यह जानते हुए भी कि फ़िरौन उन्हें मार डालेगा।

यीशु के समय, इज़राइली चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत जानकार थे, इसलिए पैगंबर यीशु के चमत्कारों में अंधे को दृष्टि वापस करना, कोढ़ियों को ठीक करना और मृतकों को उठाना शामिल था।

“और तू जन्म से अंधे तथा कोढ़ी को मेरी अनुमति से स्वस्थ कर देता था और जब तू मुर्दों को मेरी अनुमति से जीवित कर देता था ” (क़ुरआन 5:110)

पैगंबर यीशु के अनुरोध पर अल्लाह द्वारा किया गया एक चमत्कार बताता है कि इस्लाम क्यों कहता है कि चमत्कार दो तरह के होते हैं। यीशु ने अल्लाह से उसे और उसके शिष्यों को भोजन की एक मेज प्रदान करने के लिए कहा। इस घटना की चर्चा क़ुरआन के अध्याय नंबर 5 अल-माइदा में की गई है। यह संदेश की सच्चाई का परीक्षण करने के लिए लोगों के अनुरोध या सुझाव पर किए गए चमत्कार का एक उदाहरण है।

“ऐ मरयम के पुत्र यीशु! क्या तेरा पालनहार ये कर सकता है कि हमपर आकाश से थाल उतार दे?” (क़ुरआन 5:112)

यीशु के अनुयायी संदेश को उन चमत्कारों की घोषणा करके फैलाना चाहते थे जिन्हें उन्होंने अपनी आंखो से देखा था। इस तरह के चमत्कार का एक और उदाहरण है जब पैगंबर सालेह के लोगों ने अनुरोध किया कि वह पहाड़ के पीछे से एक ऊंट और उसकी संतान को निकालें।

“हमने समूद को ऊंटनी का खुला चमत्कार दिया, तो उन्होंने उसपर अत्याचार किया” (क़ुरआन 17:59)

दूसरे प्रकार का चमत्कार बिना किसी सुझाव के होता है। इसमें शामिल है पेड़ के तने का पैगंबर मुहम्मद के लिए रोना और लालायित होना। पैगंबर मुहम्मद की सुन्नत में कई अन्य चमत्कार शामिल हैं जैसे कि उनकी (पैगंबर मुहम्मद की) उंगलियों से बहता पानी और उन्हें छाया मे रखने वाले पेड़। पैगंबर (राजा) सुलैमान का जीवन भी चमत्कार और आश्चर्य से भरा था। उनका राज्य और उनकी क्षमताएं मनुष्य की क्षमताओं से परे थीं, इस प्रकार यह स्पष्ट दिख रहा था कि ईश्वर ने उन्हें चमत्कार दिए जिसने उन्हें दूसरों के बीच खड़ा किया और उनकी कुलीनता और पैगंबरी की पुष्टि की। उनकी सेना में पुरुषों, जिन्न और पक्षियों की बटालियन शामिल थीं। वह पक्षियों और चींटियों दोनों के साथ बात करने में सक्षम थे।

पैगंबर मुहम्मद को सबसे आश्चर्यजनक चमत्कारों में से एक मिला था जिसके बारे में हमें जानने का सौभाग्य मिला है। एक बहुत ही कठिन वर्ष के बाद जिसमें उन्होंने अपने चाचा और अपनी प्यारी पहली पत्नी खदीजा दोनों को खो दिया था, पैगंबर मुहम्मद को एक बड़ा आशीर्वाद और चमत्कार दिया गया, जिसे रात का सफर और स्वर्गारोहण कहा जाता है। यह मक्का की पवित्र मस्जिद से यरूशलेम की अल-अक्सा मस्जिद तक रात में एक शारीरिक यात्रा थी। इसकी समाप्ति आसमान से उनके स्वर्गारोहण मे ईश्वर की उपस्थिति मे हुआ।

“पवित्र है वह जिसने रात्रि के कुछ क्षण में अपने भक्त को मस्जिदे ह़राम (मक्का) से मस्जिदे अक़्सा तक यात्रा कराई। जिसके चतुर्दिग हमने सम्पन्नता रखी है, ताकि उसे अपनी कुछ निशानियों का दर्शन कराएं। वास्तव में, वह सब कुछ सुनने-जानने वाला है।” (क़ुरआन 17:1)

6ठी शताब्दी में, हालांकि अरब के लोग मुख्य रूप से अनपढ़ थे, लेकिन बोलने वाले शब्दो मे माहिर थे। उनकी कविता और गद्य वाक्पटु और साहित्यिक उत्कृष्टता का एक मॉडल था। जो लोग मुहम्मद के संदेश में विश्वास नहीं करते थे वे भी जानते थे कि क़ुरआन तुलना से परे साहित्य है। इस प्रकार क़ुरआन को ही चमत्कार माना जाता है। पैगंबर मुहम्मद ने एक प्रामाणिक हदीस में कहा , "हर पैगंबर को चमत्कार दिए गए थे जिसके कारण उनके लोग विश्वास करते थे; लेकिन, मुझे ईश्वरीय रहस्योद्घाटन दिया गया है जो अल्लाह ने मुझ पर प्रकट किया है, और मुझे आशा है कि मेरे अनुयायी पुनरुत्थान के दिन अन्य पैगंबरो के अनुयायियों से अधिक होंगे।[1]

जब पैगंबर मुहम्मद ने यह कहा तो उनका मतलब था कि क़ुरआन को चमत्कार माना जाना चाहिए। जो क़ुरआन पढ़ता है वह देखता है कि इसकी सामग्री जिसमे शामिल है वैज्ञानिक, भविष्यवाणी और ऐतिहासिक जानकारी, इसे चमत्कार बनाती है। सभी पैगंबरो के अपने जीवन के चमत्कारी पहलू थे, लेकिन पैगंबर मुहम्मद के अंतिम पैगंबर होने के नाते उनके प्रमुख चमत्कार यानि क़ुरआन को एक जीवित चमत्कार माना जाता है। इसके समान एक अध्याय (सबसे छोटा केवल 3 छंदो वाला) तैयार करने की क़ुरआन की चुनौती आज भी कायम है।



फुटनोट:

[1] सहीह अल-बुखारी

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