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अल्लाह पर भरोसा और निर्भरता

विवरण: यह पाठ हमें यह समझने में मदद करता है कि वास्तव में अल्लाह पर भरोसा करने का क्या अर्थ है, ताकि हम अपनी सभी परिस्थितियों में अल्लाह पर भरोसा कर सकें।

द्वारा Imam Mufti (© 2015 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > बढ़ती आस्था > आस्था बढ़ाने के साधन


उद्देश्य:

·       अल्लाह पर निर्भर होने का मतलब समझना।

·       अल्लाह पर भरोसा करना सीखना।

·       अल्लाह पर भरोसा करने के फायदे को समझना।

अरबी शब्द:

·       तवक्कुल - अल्लाह पर निर्भरता।

·       ईमान - आस्था, विश्वास या दृढ़ विश्वास।

·       अल-क़द्र - ईश्वरीय आदेश।

अल्लाह पर निर्भर होने का मतलब

TrustinAllah.jpgअल्लाह पर निर्भरता" को अरबी में तवक्कुल कहा जाता है। शब्द का शाब्दिक अर्थ है अपने मामलों को दूसरे के हाथों में रखना।

अल्लाह के कई खूबसूरत नाम हैं। 'भरोसे' से जुड़े अल्लाह के व्यक्तिगत नामों में से एक अल-वकील है - मामलों का निपटाने वाला। क़ुरआन अल-वकील नाम से चौदह बार अल्लाह को संदर्भित करता है। उदाहरण के लिए,

“और उन्होंने कहाः हमारे लिए अल्लाह पर्याप्त है और वह अच्छा काम बनाने वाला है।’” (क़ुरआन 3: 173)

“अल्लाह मामलों के निपटान करने के लिए पर्याप्त है।” (क़ुरआन 4:81)

“तथा वही प्रत्येक चीज़ का अभिरक्षक है।” (क़ुरआन 6:102)

अल्लाह हमें उस पर भरोसा करने का आदेश देता है: "वह पूर्व तथा पश्चिम का पालनहार है। नहीं है कोई पूज्य (वंदनीय) उसके सिवा, अतः, उसी को अपना करता-धरता बना लें।" (क़ुरआन 73:9)

इसी तरह, अल्लाह हमें उसकी रचना पर निर्भर होने से मना करता है: "और हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की और उसे बनी इस्राईल के लिए मार्गदर्शन का साधन बनाया कि मेरे सिवा किसी को कार्यसाधक न बनाओ।” (क़ुरआन 17:2)

ये दोनो छंद हमें दिखाती हैं कि अल्लाह पर निर्भर रहना पूजा का कार्य है। अपने समर्पित विश्वास और भरोसे के माध्यम से, हम अपने एकेश्वरवादी विश्वास को व्यक्त करते हैं, और इसलिए ये ऐसी चीजें हैं जो सिर्फ अल्लाह के लिए करना चाहिए।

कैसे अल्लाह पर निर्भर रहें?

1. निर्भरता का मतलब आलस्य न समझें

लोग कभी-कभी तवक्कुल का मतलब ये समझते हैं आपको कुछ नहीं करना है और आपकी समस्याऐं अपने आप ही हल हो जाएंगी। तवक्कुल का यह मतलब नही निकालना चाहिए की आपके प्रयास किये बिना आपकी चुनौतियों का समाधान हो जाएगा। बल्कि इस दृष्टिकोण के साथ प्रयास करना और कार्य करना कि अल्लाह आपके मामलों की देखभाल करेगा और समस्याओं से निपटने में आपकी मदद करेगा, अल्लाह पर भरोसा करने का एक हिस्सा है।

निर्भरता का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी जीविका की व्यवस्था न करें, शिक्षा ग्रहण न करें या नौकरी के लिए आवेदन न करें, और नौकरी के लिए साक्षात्कार को छोड़ दें। अल्लाह ने आदेश दिया है कि हमें काम करना चाहिए और यह उसके तरीकों से है कि वह लोगों के प्रयास का फल देता है। अपने घर में बैठकर दावा न करें कि आपका दैनिक भरण-पोषण आपके पास आ आएगा! अल्लाह हमें उस पर निर्भर रहने और साथ मे काम करने का आदेश देता है। इस प्रकार, अपनी जीविका के लिए प्रयास करना शारीरिक पूजा का कार्य है, जबकि अल्लाह पर भरोसा करना दिल की पूजा है जैसा कि अल्लाह कहता है, "अतः, खोज करो अल्लाह के पास जीविका की तथा इबादत (वंदना) करो उसकी। (क़ुरआन 29:17)

भरोसे को सही मायने में समझने का एक और तरीका यह है कि समझे ईमान क्या है। यह सिर्फ दिल में आस्था रखना नहीं है, बल्कि यह आस्था और कर्म का मेल है। इसी तरह, अल्लाह पर भरोसा करने का मतलब अपने प्रयासों को छोड़ना नहीं है, बल्कि इस दृष्टिकोण के साथ प्रयास करना है कि अल्लाह आपके मामलों का ध्यान रखेगा और आपको समस्याओं से निपटने में मदद करेगा।

याद कीजिए जब पैगंबर ने एक बेडौइन से पूछा, "आप अपने ऊंट को क्यों नहीं बांधते?" उसने उत्तर दिया, "मैं अल्लाह पर भरोसा रखता हूं!" पैगंबर ने तब कहा, "पहले अपने ऊंट को बांधो, और फिर अल्लाह पर भरोसा रखो।”[1]

2. अभिमानी मत बनो

आपको हमेशा उसके अनुसार योजना बनानी चाहिए और काम करना चाहिए जो अल्लाह ने आपको दिया है। आपको अपने आशीर्वादों के लिए अल्लाह को धन्यवाद देकर इनका उपयोग करना चाहिए, न कि अपनी व्यक्तिगत शक्तियों के बारे में अहंकार करना चाहिए। आपकी सारी शक्ति और क्षमता अल्लाह की ओर से है और अंततः यह अल्लाह की कृपा है जो आपकी सफलता को निर्धारित करेगी।

3. अल्लाह के फैसलों को स्वीकार करें

अपने सर्वोत्तम प्रयासों के बाद, जो कुछ भी होता है उसे स्वीकार करें। आपको विश्वास करना चाहिए कि अल्लाह ने अपने ज्ञान से आपकी सभी योजनाओं को उन कारणों से रद्द करने का निर्णय लिया है जिन्हें सिर्फ वह जानता है। अपने आप को याद दिलाएं कि अल-क़द्र (ईश्वरीय आदेश) में विश्वास करना आपके विश्वास के स्तंभों में से एक है। जान लें कि जो होना है वह होकर रहेगा और आप सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकते हैं।

4. सभी सावधानियां बरतें

क़ुरआन में अल्लाह हमें दो पैगंबरों, याकूब (जैकब) और उनके बेटे यूसुफ (जोसेफ) की कहानी बताता है। एक अवसर पर, अपने पुत्रों को मिस्र भेजते समय, याकूब उन्हें संदेह से बचने के लिए शहर के विभिन्न द्वारों से प्रवेश करने का निर्देश देता है, लेकिन अल्लाह कुछ और ही चाहता था। मुद्दा यह है कि याकूब ने किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए हर संभव उपाय किए।

हमें एक सामान्य नुकसान से बचना चाहिए। हम या तो अपने प्रयासों पर निर्भर होते हैं और अल्लाह पर भरोसा करना भूल जाते हैं या हमें लगता है कि हम अपनी समस्याओं को हल करने के लिए कोई व्यावहारिक उपाय न कर के अल्लाह पर भरोसा कर रहे हैं।

तवक्कुल के लाभ

हमें अपने दैनिक जीवन में तवक्कुल को लागू करने की आवश्यकता है। तवक्कुल के प्रमुख लाभों में से एक यह है कि यह हमें दैनिक चुनौतियों की अनावश्यक चिंता, सोच और परिणामी अवसाद से मुक्त कर सकता है। यह मानते हुए कि हमारे सभी मामले अल्लाह के हाथ में हैं और हम केवल वही कर सकते हैं जो हमारे नियंत्रण में है, हम परिणाम अल्लाह पर छोड़ देते हैं और उसके आदेश को स्वीकार करते हैं चाहे वो जो कुछ भी हो। एक समझदार मुसलमान जो तवक्कुल को समझता है, वह प्रयास करना नहीं छोड़ता, लेकिन सफलता से अत्यधिक उत्साहित या असफलता से निराश भी नहीं होता है।



फुटनोट:

[1] तिर्मिज़ी

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