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तकवा के फल (2 का भाग 2)

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विवरण: तक़वा के बारे में हमारे धर्मी पूर्ववर्तियों की क्या राय थी और अल्लाह के प्रति चेतना को बढ़ाने के कुछ सुझाव।

द्वारा Aisha Stacey (© 2014 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 20 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 1,300 (दैनिक औसत: 3)


उद्देश्य:

·यह समझना कि तक़वा एक महत्वपूर्ण इस्लामी अवधारणा है और हमें इसके प्रति वफादार रहने का प्रयास करना चाहिए।

अरबी शब्द:

·अल्हम्दुलिल्लाह - सभी प्रशंसा और धन्यवाद अल्लाह के लिए है। यह कहकर हम आभारी होते हैं और हम स्वीकार करते हैं कि सब कुछ अल्लाह की ओर से है।

·हदीस - (बहुवचन - हदीसें) यह एक जानकारी या कहानी का एक टुकड़ा है। इस्लाम में यह पैगंबर मुहम्मद और उनके साथियों के कथनों और कार्यों का एक वर्णनात्मक रिकॉर्ड है।

·सलाफ - यह शब्द मुख्य रूप से प्रारंभिक मुसलमानों को संदर्भित करता है; अर्थात् पैगंबर के साथी, उनके उत्तराधिकारी और उनके अनुयायी। इसमें वे सभी भी शामिल हैं जो न्याय के दिन तक उनके पदचिन्हों पर चलेंगे।

·तक़वा - अल्लाह का खौफ या डर, धर्मपरायणता, ईश्वर-चेतना। यह बताता है कि व्यक्ति जो कुछ भी करता है उसे अल्लाह देख रहा है।

FruitsofTaqwa2.jpgपिछले पाठ में हमने क़ुरआन के कई छंदो से तकवा के फल के बारे मे जाना। इससे हमने सीखा कि तक़वा एक वांछनीय विशेषता है जिसके लिए विश्वासियों को प्रयास करने की आवश्यकता है; इस प्रयास के बदले विश्वासी को असंख्य लाभ प्राप्त होंगे। इस पाठ में हम जानेंगे कि तक़वा के बारे में सलफ का क्या कहना था । ये पुरुष, महिलाएं और बच्चे अपने तक़वा का विश्लेषण करते थे, हालांकि वे कभी भी तक़वा रखने का दावा नहीं करते थे। यह कुछ ऐसा था जिसे वे अपने और अल्लाह के बीच का मानते थे, क्योंकि अल्लाह ने क़ुरआन में निम्नलिखित कहा है:

“… अतः, अपने में पवित्र न बनो। वही भली-भांति जानता है उसे, जिसने सदाचार किया है।” (क़ुरआन 53:32)

पैगंबर मुहम्मद ने कहा, "तकवा यहां है," और उन्होंने अपनी छाती की ओर इशारा किया।[1]

मुसलमानों के धर्मी नेता उमर इब्न अब्दुल अजीज ने कहा, "कोई भी तक़वा के स्थान पर तब तक नहीं पहुंच सकता जब तक कि उसका ऐसा कोई कार्य और शब्द हो जो इस दुनिया में या उसके बाद उसकी शर्मिंदगी का कारण बने।" उनसे एक बार पूछा गया था, "उपासना करने वाला तक़वा की चोटी पर कब पहुंचता है?" उन्होंने उत्तर दिया, "यदि वह अपने दिल के सभी विचारों और इच्छाओं को एक थाली में रखकर बाजार में घूमे, और उसे वहां उन सभी चीज़ों पर शर्मिंदगी महसूस न हो।"

उमर इब्न अल- खत्ताब ने उबे इब्न काब से तक़वा (पवित्रता) के बारे में पूछा। उबे इब्न काब ने कहा: क्या तुम कांटेदार रास्ते से चले हो? उमर ने उत्तर दिया: "हां, वास्तव में"। उबे ने फिर उनसे पूछा: "तुमने क्या किया?" उमर ने जवाब दिया: "मैंने (अपना कपड़ा) ऊपर किया और अपनी पूरी कोशिश की (कांटों से बचने के लिए)"। तब उबे ने कहा, "वह तक़वा है।

फुदैल इब्न 'इयाद (मृत्यु 803 सीई), एक चोर जिसने अल्लाह की खातिर अपना जीवन बदल दिया, उससे पूछा गया, "आप क्या चाहते हैं कि मै किस देश में रहूं?" उन्होंने उत्तर दिया, "आपके और किसी भी राष्ट्र के बीच कोई संबंध नहीं है। आपके लिए सबसे अच्छा देश वह देश है जो आपको तक़वा हासिल करने में मदद करे।

सुफ्यान अल-थावरी इब्न सईद (716-778 सीई) एक इस्लामी विद्वान और न्यायविद थे जिन्होंने हदीस को भी संकलित किया था। उनको कथनो के एक बड़ी संख्या का श्रेय दिया जाता है। तक़वा के संबंध में उन्होंने कहा, "हम ऐसे लोगों से मिले जिन्होंने ये पसंद किया जब उनसे कहा गया - परमप्रधान अल्लाह से डरो, उन्होंने इसे सावधानी से सुना, लेकिन आज आप देखते हैं कि लोग इस पर नाराज हो जाते हैं!" यदि हम इस महान व्यक्ति की मृत्यु के वर्ष को देखें तो हम देख सकते हैं कि यह पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु के 100 वर्ष से भी कम का समय था। इतने कम समय में तकवा ने अपना महत्व खोना शुरू कर दिया था। तकवा का अर्थ समझना और इसे कैसे प्राप्त करना है, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण इस्लामी अवधारणा है।

इस्लाम के खलीफाओं ने खुद को और अपने आसपास के लोगों को तक़वा रखने की सलाह दी। वे जानते थे कि अल्लाह से डरने का मतलब यह जानना है कि अल्लाह उन्हें हर समय देख रहा है, वे जानते थे कि पाप, गलती या दुराचार को छिपाने की कोई जगह नहीं है। रहम करने वाला अल्लाह हमारे पापो को देखता है, फिर भी अगर तक़वा सच्चा हो तो हम पर कभी न खत्म होने वाला रहम करता है।

अबू बक्र ने एक उपदेश में कहा था, 'मैं तुम्हें अल्लाह से डरने की सलाह देता हूं।[2] और जब वह मर रहे थे, तो उन्होंने उमर को बुलाया और उन्हें अल्लाह से डरने की सलाह दी।[3] इसी तरह उमर ने अपने बेटे को यह लिखा, "मैं तुम्हें अल्लाह से डरने की सलाह देता हूं।”[4] अली इब्न अबी तालिब ने अपनी एक सेना के नेता को यह कहते हुए सलाह दी कि "मैं आपको अल्लाह से डरने की सलाह देता हूं जिससे आप निश्चित रूप से मिलेंगे।”[5]

याद रखें कि तक़वा एक आस्तिक को प्रोत्साहित करता है कि वह उन सभी चीज़ों से सावधान रहें जो अल्लाह को नाराज करती है। तक़वा से एक आस्तिक अल्लाह को खुश करने के लिए भी उत्सुक बनता है। निम्नलिखित कुछ आसान चीजें हैं जो हम अपने तकवा को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं:

1.हर दिन कुछ समय क़ुरआन पढ़ने में बिताएं।

2.ईश्वर की बातो के अर्थों पर विचार करें और उसके अनुसार कार्य करने का प्रयास करें।

3.अल्लाह को स्तुति के शब्दों के साथ याद करें, जैसे अल्हम्दुलिल्लाह।

4.अच्छे कामों में व्यस्त रहने की कोशिश करें, याद रखें कि यह मुस्कुराने जितना आसान हो सकता है।

5.अच्छी संगति रखें। उन लोगों के आस-पास रहने की कोशिश करें जिनके बारे में आपको लगता है कि उनके पास तक़वा है।

6.विनम्र बनने की कोशिश करें।

7.धार्मिक ज्ञान प्राप्त करें।

“… और अपने लिए प्रावधान बना लो, उत्तम प्रावधान अल्लाह की आज्ञाकारिता है तथा हे समझ वालो! मुझी से डरो।” (क़ुरआन 2:197)



फुटनोट:

[1] सहीह मुस्लिम,अत-तिर्मिज़ी

[2] अल-हकीम द्वारा अल-मुस्तद्रक में रिकॉर्ड किया गया

[3] अबू नुएम द्वारा हिल्याह अल-अवलिया में रिकॉर्ड किया गया’

[4] इब्न रजब अल-हनबली ने जामी अल-उलूम वल-हिकम में इसका उल्लेख किया है

[5] किताब अस-सुन्नह में अल-खिलाल द्वारा रिकॉर्ड किया गया

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