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इस्लाम के आहार कानून का परिचय

विवरण: क़ुरआन और सुन्नत में बताये गए दिशा-निर्देशों के अनुसार खाना-पीना एक पुरस्कृत कार्य बन सकता है। इस पाठ में इस्लामी आहार कानून के बुनियादी नियमों पर प्रकाश डाला गया है।

द्वारा Imam Mufti

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > इस्लामी जीवन शैली, नैतिकता और व्यवहार > आहार कानून


उद्देश्य

·       इस्लामी आहार कानूनों के अनुसार खाने योग्य और निषिद्ध खाद्य पदार्थों के बीच अंतर को समझना।

·       शाकाहार और अन्य आहार पर इस्लामी राय जानना।

·       मद्यपान और दिमाग की स्थिति बदलने वाली दवाओं पर इस्लामी राय समझना।

अरबी शब्द

·       सुन्नत - अध्ययन के क्षेत्र के आधार पर सुन्नत शब्द के कई अर्थ हैं, हालांकि आम तौर पर इसका अर्थ है जो कुछ भी पैगंबर ने कहा, किया या करने को कहा।

·       हलालखाने योग्य।

·       हराम - वर्जित या निषिद्ध।

·       शिर्क - एक ऐसा शब्द जिसका अर्थ है अल्लाह के साथ भागीदारों को जोड़ना, या अल्लाह के अलावा किसी अन्य को दैवीय बताना, या यह विश्वास करना कि अल्लाह के सिवा किसी अन्य में शक्ति है या वो नुकसान या फायदा पहुंचा सकता है।

क़ुरआन और सुन्नत ने मुसलमानों को दिशानिर्देश दिए हैं की क्या खाने योग्य है और क्या नही, और इस प्रकार मुस्लिम आहार सीधे ईश्वरीय आज्ञाकारिता से संबंधित है। इन दिशानिर्देशों का पालन करके मुसलमान अल्लाह का पालन करते हैं, और इस प्रकार उन्हें इसके लिए पुरस्कृत किया जाता है, क्योंकि धर्म के दिशानिर्देशों का पालन करना पूजा माना जाता है।  

खाने योग्य भोजन और पेय को हलाल बताया गया है, जबकि निषिद्ध को हराम बताया गया है। चूंकि 'आप वही हैं जो आप खाते हैं', इस्लाम शरीर और आत्मा के लिए स्वस्थ समझे जाने वाले भोजन की अनुमति देता है और जो उनके लिए हानिकारक है उसे मना करता है, जैसा कि क़ुरआन घोषित करता है:

“आज सब स्वच्छ खाद्य तुम्हारे लिए ह़लाल (वैध) कर दिये गये हैं” (क़ुरआन 5:5)

मुख्यधारा के ईसाई धर्म में बताने के लिए कोई आहार कानून नहीं है, जबकि यहूदी धर्म में कई सारे और कठोर आहार कानून हैं। हिंदू धर्म में भोजन सामाजिक स्थिति के प्रमुख संकेतकों में से एक है, क्योंकि भोजन जाति को परिभाषित करती है। दूसरी ओर, इस्लामी आहार कानून सभी विश्वासियों के लिए एक समान है, और कठोरता में वे यहूदी और ईसाई धर्म के बीच मे हैं।

इस पाठ में हम इस्लामी आहार कानून के बुनियादी नियमों से परिचित होंगे।

अच्छा और जिसकी अनुमति है

आमतौर पर, खाने-पीने के लिए हर उस चीज़ की अनुमति है जिसे अल्लाह या उसके दूत (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) ने निषिद्ध न बताया हो। जो हलाल है वह हराम की तुलना में बहुत अधिक है, और इसलिए चर्चा अक्सर हराम तक ही सीमित रहती है। सभी सब्जियां, फल, दाल और अनाज की अनुमति है, और इनके संबंध में क़ुरआन में कुछ भी स्पष्ट रूप से मना नहीं किया गया है।

मांस के संबंध मे, सभी समुद्री भोजन की अनुमति दी गई है, और इसके साथ ही गोमांस, चिकन और भेड़ के मांस की अनुमति है। इस्लाम में खाने योग्य खाद्य पदार्थों की इतनी बड़ी विविधता है कि इस लेख में उन सभी का उल्लेख करना असंभव होगा। इसलिए जैसा कि प्रथागत रूप से किया जाता है, हम इस्लाम द्वारा प्रतिबंधित आहार का उल्लेख करेंगे।

निषिद्ध खाद्य पदार्थ

1. मरे हुए जानवर के मांस का निषेध

क़ुरआन में अल्लाह कहता है:

‘वास्तव में, जिस चीज से उसने तुम्हें मना किया है वह मरे हुए जानवरों का मांस है…’ (क़ुरआन 2:173)

पहला निषिद्ध भोजन "मरे हुए जानवरों" का मांस है, यानी वह जानवर जो बिना वध या शिकार किए प्राकृतिक कारणों से मर जाता है। मरे हुए जानवर के मांस में कई स्वास्थ्य खतरे होते हैं, जिनका विवरण यहां मिल जायेगा।

लेकिन अल्लाह ने अन्य प्राणियों को इस तरह से बनाया है कि वे जीविका के स्रोत के रूप में मरे हुए जानवरो के मांस से लाभ उठा सकते हैं। इस नियम का अपवाद समुद्री भोजन है। पैगंबर मुहम्मद ने समुद्र के बारे में कहा:

 ‘इसका पानी शुद्ध है और इसके मृत हलाल (खाने योग्य) हैं।’ (मुसनद)

यह शायद नमक के संरक्षण कारक के कारण, या इस तथ्य के कारण कि मछलियों को जीवित पकड़ना और उनका "वध" करना असंभव है। यह मछली की शारीरिक बनावट के कारण भी हो सकता है।

2. बहते हुए रक्त का निषेध[1]

दूसरा निषेध बहते हुए या तरल रक्त से संबंधित है जिसे भोजन या पेय के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। वैसे भी रक्त का उपयोग करके बने हुए व्यंजनों दुर्लभ है!

3. सूअर का मांस[2]

तीसरा निषिद्ध भोजन सूअर का मांस है। सॉसेज, पेपरोनी, सलामी, चॉप्स, रिब्स, लार्ड, बेकन और हैम जैसे सभी पोर्क उत्पाद प्रतिबंधित हैं।

4. अल्लाह के अलावा किसी और को समर्पित जानवर[3]

चौथा निषेध उन जानवरों [4] को संदर्भित करता है जो अल्लाह के अलावा किसी और को समर्पित किये जाते हैं, अर्थात्, जिन्हें अल्लाह के नाम के अलावा किसी अन्य नाम के आह्वान के साथ वध किया जाता है, जैसे कि मूर्तियां, खगोलीय वस्तुएं, पैगंबर या संत। किसी जानवर का वध करते समय, अरब बहुदेववादी उनकी मूर्तियों के नाम पुकारते थे। इस मामले में, निषेध का कारण पूरी तरह से आस्था से संबंधित है: भोजन की खपत के मामलों में अल्लाह में विश्वास की रक्षा करने के लिए, पूजा को शुद्ध करने के लिए, और शिर्क का विरोध करने के लिए। वास्तव में अल्लाह ही है जिसने मनुष्य को पैदा किया और जानवरों को उसके अधीन कर दिया और उसे इस शर्त पर भोजन के लिए उसकी जान लेने की अनुमति दी कि उसका नाम वध के समय लिया जाएगा। जानवर का वध करते समय अल्लाह के नाम का उच्चारण करना एक घोषणा है कि कोई इस प्राणी के जीवन को उसके निर्माता की अनुमति से ले रहा है, जबकि यदि कोई किसी अन्य नाम का आह्वान करता है तो उसने इसका उलंघन किया है और मांस का उपयोग नही करना चाहिए।

5. ऐसे साधनों से वध करना जो रक्त को ठीक तरह से बाहर नहीं निकलने देते[5]

क़ुरआन में अल्लाह इस श्रेणी के विभिन्न रूपों का उल्लेख करता है:

गला घोंटना: एक जानवर जिसका गला घोंटा गया हो वह निषिद्ध है, उदाहरण के लिए, गले में रस्सी से या दम घुटने से।

- पीट-पीटकर मारा गया6]

- गिरा हुआ जानवर[7]: एक जानवर जो किसी ऊंचे स्थान से गिरने या नाले या खड्ड में गिरने से मर जाता है।

- सींग घुसा हुआ[8]: एक जानवर जो दूसरे जानवर के सींग लगने से मर जाता है।

- अन्य जानवरों द्वारा आंशिक रूप से खाया गया[9]: एक जानवर जिसे आंशिक रूप से जंगली जानवरों ने खाया और वह परिणामस्वरूप मर गया।

6. अन्य जानवर

क़ुरआन अल्लाह के दूत से संबंधित कहता है:

“...उनके लिए स्वच्छ चीज़ों को ह़लाल (वैध) तथा मलिन चीज़ों को ह़राम (अवैध) करेंगे...” (क़ुरआन 7:157)

क़ुरआन द्वारा निषिद्ध स्थलीय जानवरों के अलावा, पैगंबर ने सभी कुत्ते जैसे दांतो वाले मांसाहारी जानवर और पंजे वाले सभी पक्षी को खाने से मना किया था [10]  मांसाहारी जानवर उनको इंगित करते हैं जो दूसरों का शिकार करते हैं और उन्हें फाड़कर खा जाते हैं, जैसे शेर, चीता, भेड़िया, आदि; पंजे वाले पक्षी जैसे बाज, चील, आदि।

यहूदियों और ईसाइयों द्वारा मारे गए जानवर

इस्लाम इस बात पर जोर देता है कि जानवरों का वध एक निर्धारित तरीके से किया जाना चाहिए।[11]  जबकि इस्लाम बहुदेववादियों द्वारा वध किए गए मांस के प्रति एक अडिग रवैया अपनाता है, यह यहूदियों और ईसाइयों द्वारा वध किए गए मांस के मामले में नम्र है, क्योंकि उनके रहस्योदघाटनों में भी उन्हें ईश्वर के नाम पर वध करने का आदेश दिया गया है। [12]  नतीजतन, इस्लाम उनके द्वारा वध किए गए मांस की अनुमति देता है:

“…और जिन्हें तुमसे पहले पुस्तक दिये गये हैं उनका खाद्य तुम्हारे लिये ह़लाल (वैध) है।” (क़ुरआन 5:5)

आवश्यकता अपवादों को निर्धारित करती है

“...उसने तुम्हारे लिए स्पष्ट कर दिया है, जिसे तुम पर ह़राम (अवैध) किया है, परन्तु जिस वर्जित के खाने पर विवश कर दिये जाओ...” (क़ुरआन 6:119)

इस्लामी कानून में, आवश्यकता तब मानी जाती है जब किसी को मृत्यु या बड़े नुकसान का डर होता है। अगर किसी को खाने के लिए वर्जित के अलावा कुछ नहीं मिलता है और उसे न खाने से मृत्यु हो सकती है, तो वह इस नियम को लागू कर सकता है। हालांकि, सीमा के भीतर रहना चाहिए और उतना ही खाना चाहिए जिस से वो जीवित रह सके।

शाकाहार और अन्य आहार

कई तरह के मांस हलाल होते हैं , लेकिन एक मुसलमान को मांस खाना जरुरी नही है, यह आस्था का हिस्सा नहीं है! मुसलमान अपनी मर्जी से शाकाहारी हो सकता है। ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें एक मुसलमान खा सकता है, और किसी को यह नहीं लगना चाहिए कि उन्हें ऐसी चीजें खानी है जो उन्हें पसंद नही है। पैगंबर ने खुद प्याज या लहसुन खाना पसंद नहीं किया, न ही रेगिस्तान की छिपकली, एक प्रकार का मांस जो उनके समय में कुछ लोग खाते थे। हालांकि, किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि मांस खाने में नैतिक रूप से कुछ गलत है, अन्यथा उन्हें लगेगा की वो नैतिकता के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं, जो कि केवल अल्लाह का अधिकार है।

मद्यपान और दिमाग की स्थिति बदलने वाली दवाएं

इस्लाम से पहले के अरब के लोग शराब पीने के शौकीन थे। शराब के प्रति उनका प्यार उनकी भाषा में दिखता है, इसमें शराब के लगभग सौ नाम हैं, और उनकी कविता में जो शराब, जाम और पीने की पार्टियों की प्रशंसा करता है।

समाज से मद्यपान की बुराई को मिटाने के लिए, अल्लाह ने इसे चरणों में प्रतिबंधित किया। सबसे पहले, अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि शराब पीने का नुकसान इसके लाभ से अधिक है। इसके बाद, अल्लाह ने उनसे कहा कि नशे की हालत में नमाज न पढ़ो; और अंत में, अल्लाह ने उस छंद को प्रकट किया जिसमे शराब को पूरी तरह से मना किया गया था।[13]

जब शराब न पीने की आयत सामने आई तो मुसलमानों की प्रतिक्रिया उल्लेखनीय थी। हाथ में आंशिक रूप से भरे प्याले लिए लोग शराब पी रहे थे। जैसे ही उन्होंने किसी को इसके निषेध की घोषणा करने वाले छंद को चिल्लाते हुए सुना, उन्होंने शेष पेय को जमीन पर फेंक दिया और अपने प्यालों को तोड़ दिया।

पैगंबर ने सभी नशीले पदार्थों को पूरी तरह से प्रतिबंधित घोषित कर दिया:

“जो कुछ भी दिमाग की स्थिति बदल देता है वह शराब है, और हर प्रकार की शराब हराम है।” (सहीह मुस्लिम)

भांग, कोकीन, अफीम, और इसी तरह की दवाएं निश्चित रूप से शराब की निषिद्ध श्रेणी में शामिल हैं और इसलिए हराम हैं।

इस्लाम सभी नशीले पदार्थों को मना करता है, चाहे जितनी भी मात्रा में सेवन किया जाए। इसलिए पैगंबर ने कहा:

“नशा करना हराम है चाहे वो अधिक मात्रा में हो या थोड़ी मात्रा मे।” (अबू दाउद, अल-तिर्मिज़ी)

अंतिम शब्द ... इस्लाम अपनाने के बाद एक नए मुसलमान के लिए आहार को बदलना शायद उसके जीवन शैली का एक प्रमुख बदलाव है। इसे आपके पहले के कई लोग कर चुके हैं, यह एक समायोजन है जिसे आप कुछ आत्म-अनुशासन और अल्लाह की मदद से कर पाएंगे। अंत में, मांस खरीदने के लिए अपने क्षेत्र की हलाल मीट की दुकानों को ढूंढना शायद सबसे सुरक्षित है।



फुटनोट:

[1] ‘…और खून…’ (क़ुरआन 2:173)

[2] ‘…और सूअर का मांस…’ (क़ुरआन 2:173)

[3] ‘…और वह जो अल्लाह के अलावा किसी और को समर्पित किया गया है।’ (क़ुरआन 2:173)

[4] और सादृश्य से, कुछ भी खाने योग्य या न खाने योग्य।

[5] ‘तुमपर मुर्दार ह़राम (अवैध) कर दिया गया है तथा बहता हुआ रक्त, सूअर का मांस, जिसपर अल्लाह से अन्य का नाम पुकारा गया हो, जो श्वास रोध और आघात के कारण मारा हो…’ (क़ुरआन 5:3)

[6] ‘…या पीटकर…’ (क़ुरआन 5:3)

[7] ‘…या गिर कर…’ (क़ुरआन 5:3)

[8] ‘…या सींग घुसने से…’ (क़ुरआन 5:3)

[9] ‘…और वह जो आंशिक रूप से किसी जंगली जानवर द्वारा खाया गया हो…’ (क़ुरआन 5:3)

[10] सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम

[11] वध के इस्लामी तरीके का विवरण इस पाठ के दायरे से बाहर है।

[12] "धन्य है तू... जिस ने हमें ईश्वर की आज्ञाओं से पवित्र किया, और वध करने की आज्ञा दी।" शेचिता, विल्हेम बाकर, जूलियस एच. ग्रीनस्टोन। यहूदी विश्वकोश। (http://www.jewishencyclopedia.com/view.jsp?artid=582&letter=S)

[13] क़ुरआन 5:90।

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