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सही मार्गदर्शित खलीफा: अली इब्न अबी तालिब (2 का भाग 1)

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विवरण: पैगंबर मुहम्मद के साथी, चचेरे भाई और दामाद, और इस्लाम के चौथे सही मार्गदर्शित खलीफा की एक संक्षिप्त जीवनी। हम अली की कुछ उपलब्धियों और चुनौतियों पर भी एक संक्षिप्त नज़र डालेंगे।

द्वारा Aisha Stacey (© 2014 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 20 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 1,276 (दैनिक औसत: 3)


उद्देश्य:

·अली इब्न अबी तालिब के जीवन के बारे में जानना और इस्लाम के इतिहास में उनके महत्व को समझना।

अरबी शब्द:

·खलीफा (बहुवचन: खुलाफ़ा) - वह प्रमुख मुस्लिम धार्मिक और नागरिक शासक है, जिन्हें पैगंबर मुहम्मद का उत्तराधिकारी माना जाता है। खलीफा का मतलब सम्राट नही है।

·उम्मत - मुस्लिम समुदाय चाहे वो किसी भी रंग, जाति, भाषा या राष्ट्रीयता का हो।

·राशिदुन - सही मार्गदर्शित लोग। अधिक विशेष रूप से, पहले चार खलीफाओं को संदर्भित करने का एक सामूहिक शब्द।

·हिज्राह - एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करना। इस्लाम में, हिज्राह मक्का से मदीना की ओर पलायन करने वाले मुसलमानों को संदर्भित करता है और इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत का भी प्रतीक है।

The_Rightly_Guided_Caliphs_Ali_ibn_AbiTalib_(part_1_of_2)._001.jpgअली इब्न अबी तालिब इस्लाम के चौथे सही मार्गदर्शित खलीफा हैं, चौथे राशिदुन। उन्होंने अबू बक्र, उमर इब्न अल-खत्ताब और उस्मान के बाद 656 से 661 ईस्वी तक मुस्लिम उम्मत पर शासन किया था। अली ने अपना बचपन अपने प्यारे चचेरे भाई मुहम्मद के महान चरित्र का अनुकरण करते हुए बिताया, और अपनी जवानी इस्लाम सीखते हुए। अली एक विनम्र हृदय के साथ एक महान योद्धा थे और उन्हें उनके साहस, ईमानदारी, उदारता, दया और इस्लाम के प्रति समर्पण के लिए याद किया जाता है।

अली, अबू तालिब के पुत्र थे, अबू तालिब पैगंबर मुहम्मद के चाचा और अभिभावक थे। जब अली छोटे थे, तो मक्का और उसके आसपास के क्षेत्र मे एक बड़े अकाल ने तबाही मचा दी थी और अबू तालिब अपने परिवार का पालन पोषण करने मे असमर्थ थे। पैगंबर मुहम्मद (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) और उनकी पत्नी खदीजा ने अली की देखभाल करने की पेशकश की। इसके बाद अली और मुहम्मद बहुत करीब हो गए और अली ने अपने चचेरे भाई के व्यवहार और महान चरित्र का अनुकरण करने की पूरी कोशिश की। अली लगभग 10 वर्ष के थे जब पैगंबर मुहम्मद को पहला रहस्योद्घाटन मिला। वह भी घर में मौजूद थे जब मुहम्मद ने अपने परिवार को बताया कि उन्हें अल्लाह का दूत बनाया गया है। इस प्रकार अली ने बहुत कम उम्र में इस्लाम की सच्चाई को स्वीकार किया और अपने चचेरे भाई के प्रति उनका समर्पण और समर्थन निर्विवाद था।

इस्लाम का इतिहास पैगंबर मुहम्मद (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) के लिए अली की प्रतिबद्धता के उदाहरणों से भरा हुआ है। जब पैगंबर मुहम्मद ने नई आस्था और उसमें अपना पद बताने के लिए अपने कबीले की एक बैठक बुलाई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से पूछा कि कौन उनका समर्थन करेगा। जब वहां उपस्थित सभी लोग चुप हो गए, तो एक छोटा लड़का अली खड़ा हुआ और अपना समर्थन देने का वचन दिया। जब मक्का के नेता पैगंबर मुहम्मद की हत्या की योजना बना रहे थे, तब मुसलमानों ने मक्का छोड़ने और यथ्रिब (जिसे जल्द ही मदीना नाम दिया गया) मे हिज्रह करने का फैसला किया। सिर्फ मुहम्मद, अबू बक्र और अली ही वहां रह गए थे। जब पैगंबर मुहम्मद और अबू बक्र रात में रेगिस्तान के रास्ते चले गए, तब अली पैगंबर के बिस्तर पर सोए रहे और हत्यारों का सामना करने की प्रतीक्षा करते रहे। अली उस रात बच गए, और अगले कुछ दिनों में उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के पास भरोसे पर छोड़े गए क़ीमती सामानों को उनके असली मालिकों को वापस कर दिया। अपना कार्य पूरा करने के तुरंत बाद अली यथ्रिब में मुसलमानों में शामिल हो गए।

उस्मान की तरह अली भी पैगंबर के दामाद थे। उन्होंने पैगंबर मुहम्मद की सबसे छोटी बेटी फातिमा से शादी की थी। अली और फातिमा ने बहुत ही विनम्र जीवन व्यतीत किया लेकिन कभी-कभी उनका जीवन बहुत कठिन था। कई बार वे भूखे रहते और अधिक काम करते लेकिन फिर भी उनकी उदारता बानी रही। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने अपने से भी गरीब व्यक्ति की मदद करने के लिए अपना आखिरी भोजन दे दिया। एक बार जब युवा जोड़े ने पैगंबर मुहम्मद से एक नौकर मांगने के लिए संपर्क किया, तो उन्होंने फटकार लगाई और कहा कि मस्जिद गरीबों से भरी हुई है और आप विलासिता मांग रहे हो। उसी शाम पैगंबर मुहम्मद, अली और फातिमा के घर गए और उन्हें अल्लाह की याद के शब्द सिखाए। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके काम के बोझ को कम करने के लिए एक नौकर की तुलना में अल्लाह को याद करना अधिक फायदेमंद होगा। अली उस रात उन्हें दी गई सलाह के शब्दों को कभी नहीं भूले, और उन्होंने कहा कोई भी रात ऐसी नहीं थी जब उन्होंने सोने से पहले उन शब्दों को न पढ़ा हो।

अली और फातिमा की शादी फातिमा की मृत्यु तक, दस साल तक चली। उस दौरान उनके चार बच्चे हुए और उनके बेटे हसन और हुसैन विशेष रूप से पैगंबर मुहम्मद के प्यारे थे। हालांकि एक से अधिक विवाह की अनुमति थी, लेकिन फातिमा के जीवित रहते हुए अली ने दूसरी महिला से शादी नहीं की, और उनकी शादी को खास माना जाता है। वे एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे, और पैगंबर मुहम्मद उन दोनों से बहुत प्यार करते थे। फातिमा की मृत्यु के बाद, अली ने अन्य स्त्रियों से शादी की और उनमें अधिक बच्चे हुए।

अली को पैगंबर मुहम्मद के साथियों में से सबसे अधिक गुणी बताया गया है और उन्हें इस्लाम के कट्टर समर्थकों में से एक माना जाता था। अली एक मजबूत योद्धा बन गए और वह मक्का के खिलाफ महत्वपूर्ण पहली लड़ाई में मशहूर हो गए, जिसे बद्र की लड़ाई के रूप में जाना जाता है। पैगंबर मुहम्मद ने अली को 'अल्लाह का शेर' उपनाम दिया। पैगंबर मुहम्मद की प्रामाणिक परंपराओं में यह बताया गया है कि खैबर की लड़ाई के दौरान, पैगंबर ने अपने युवा चचेरे भाई को एक बड़ा सम्मान दिया था। लड़ाई से एक रात पहले पैगंबर मुहम्मद ने अपने साथियों को सूचित किया कि झंडा 'एक ऐसे व्यक्ति को दिया जाएगा जो अल्लाह और उसके दूत से प्यार करता है और अल्लाह और उसके दूत भी उससे प्यार करते हैं, वह युद्ध के मैदान से नहीं भागता है, और अल्लाह उसके माध्यम से जीत दिलाएगा'। साथियों ने यह सोचकर रात बिताई कि झंडा किसे सौंपा जाएगा। हर साथी को इस सम्मान की आस थी, लेकिन इस बार यह सम्मान अली का था।

पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु के बाद और अबू बक्र के खलीफा चुने जाने के बाद, अली ने सांसारिक जीवन से संन्यास ले लिया और क़ुरआन के अध्ययन और शिक्षण के लिए खुद को समर्पित कर दिया। अबू बक्र और उमर इब्न अल-खत्ताब दोनों ने राज्य के मामलों पर उनसे परामर्श किया और उनकी एक बेटी उम्मे कुलसुम से उमर की शादी करवाई। जब मुस्लिम उम्मत की सेवा में उस्मान इब्न अफ्फान की हत्या कर दी गई , तो अली को चौथा सही मार्गदर्शित खलीफा चुना गया।

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