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न्यू मुस्लिम ई-लर्निंग साइट में आपका स्वागत है। यह नए मुस्लिम धर्मान्तरित लोगों के लिए है जो अपने नए धर्म को आसान और व्यवस्थित तरीके से सीखना चाहते हैं। इसमे पाठों को स्तरों के अंतर्गत संयोजित किए गया है। तो पहले आप स्तर 1 के तहत पाठ 1 पर जाएं। इसका अध्ययन करें और फिर इसकी प्रश्नोत्तरी करें। जब आप इसे पास कर लें तो पाठ 2 वगैरह पर आगे बढ़ें। शुभकामनाएं।

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अच्छी आदतें जो नए मुसलमानों को सीखना चाहिए

विवरण: उन दस अच्छी आदतों की एक सूची और स्पष्टीकरण जो नए मुसलमान को सीखना चाहिए। ये आदतें व्यक्ति को अपने जीवन के नए तरीके को अधिक प्रभावी ढंग से समझने और अभ्यास करने में मदद करेंगी।

द्वारा Aisha Stacey (© 2012 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > इस्लामी जीवन शैली, नैतिकता और व्यवहार > सामान्य नैतिकता और व्यवहार


उद्देश्य:  

·       नए मुसलमानों के लिए कुछ दिशानिर्देश ताकि वो इस्लाम के बारे में अधिक जान सकें, और कुछ लाभकारी प्रथाएं जो इस्लाम का पालन करना आसान बनाते हैं।

अरबी शब्द:

·       इंशाअल्लाह - ईश्वर की इच्छा, अगर ईश्वर ने चाहा। यह एक अनुस्मारक और स्वीकृति है कि अल्लाह की इच्छा के बिना कुछ भी नहीं होता है।

·       अल्हम्दुलिल्लाह - सभी प्रशंसा और धन्यवाद अल्लाह के लिए है। यह कहकर हम आभारी होते हैं और हम स्वीकार करते हैं कि सब कुछ अल्लाह की ओर से है।

·       सुभानअल्लाह - कितना मुकम्मल है अल्लाह, हर अधूरेपन से दूर है अल्लाह।

·       अल्लाहु अकबर - अल्लाह सबसे महान है।

जब कोई व्यक्ति इस्लाम को अपने धर्म के रूप में स्वीकार करता है, तो उसे पता चलता है कि इस्लाम सिर्फ एक धर्म से बढ़कर है - यह जीवन जीने का एक तरीका है। पूजा सिर्फ विशेष दिनों या विशेष समारोहों के लिए नहीं है; यह हमारे जीने और मरने, हमारे काम करने और हमारे खेल, हमारे आराम और हमारे अध्ययन का एक हिस्सा है। संक्षेप में इस्लाम वो है जिसे हम अपने सभी कार्यों, विचारों और कर्मों के साथ जीते हैं। एक ईश्वर के उपासक के रूप में हमारे दैनिक जीवन में हमारी सहायता करने के लिए अच्छी आदतें विकसित करना आसान है। शुरूआत करने के लिए नीचे कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं। ये वो आदतें हैं जिनसे व्यक्ति ऐसे परिचित हो जायेगा जैसे वो सांस लेता है, इंशाअल्लाह

1.     हर रोज कुछ समय क़ुरआन के अनुवाद को पढ़ने मे लगाएं।

2.     प्रार्थना करने का तरीका सीखने पर पूरा ध्यान दें। अपनी प्रार्थनाओं को तब तक सुधारने की कोशिश करें जब तक कि आप संतुष्ट न हों कि आप सही तरीके से प्रार्थना कर रहे हैं। कभी-कभी इसमें आपकी उम्मीद से अधिक समय लगता है, इसलिए निराश न हों।

3.     ईश्वर को याद करने के कुछ शब्द सीखने का प्रयास करें। इन्हें दिन हो या रात किसी भी समय पढ़ा जा सकता है। यदि आपको लगता है कि आप प्रार्थना के पुरे नियम नही जानते हैं, लेकिन अल्लाह से जुड़े रहना चाहते हैं तो प्रार्थना के अंत इन शब्दो को दोहरा सकते हैं। सुभानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह और अल्लाहु अकबर कहना सीखें।

 “अतः, मुझे याद करो, मैं तुम्हें याद करूंगा, और मेरे आभारी रहो और मेरे कृतघ्न न बनो।” (क़ुरआन 2:152)

4.     प्रतिदिन कुछ न कुछ दान अवश्य करें। याद रखें कि इस्लाम में दान देना उतना ही सरल हो सकता है जितना एक व्यक्ति की ओर मुस्कुराना और उसके दिन को अच्छा बनाना।

पैगंबर मुहम्मद ने कहा, "हर मुसलमान को दान देना चाहिए।" फिर लोगों ने पूछा: "लेकिन अगर किसी के पास देने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे क्या करना चाहिए?" पैगंबर ने उत्तर दिया: "उसे अपने हाथों से काम करना चाहिए और खुद को लाभ पहुंचाना चाहिए और दान में भी देना चाहिए (जो वह कमाता है)।" लोगों ने आगे पूछा: "अगर किसी के पास वह भी न हो?" पैगंबर ने उत्तर दिया: "उसे उन लोगो की मदद करनी चाहिए जिनको मदद की जरुरत हो।" फिर लोगों ने पूछा: "अगर वह ऐसा भी न कर सके?" पैगंबर ने अंत में कहा: "फिर उसे अच्छे कर्म करने चाहिए और बुरे कामों से दूर रहना चाहिए, और इसे दान माना जाएगा।”[1]

“दया का हर कार्य दान है।”[2]

5.     अपना खाली समय बर्बाद न करें। आपको पता चलेगा कि 1001 ऐसी चीजें हैं जो फायदेमंद हैं। वीडियो गेम पर और इंटरनेट पर सर्फिंग करते हुए समय बर्बाद करने से अच्छा समय को कहीं अच्छी जगह खर्च किया जा सकता है। एक बार जब आप समझ जाते हैं कि हर एक चीज अल्लाह की पूजा करने का एक तरीका हो सकता है तो घंटों तक वीडियो गेम खेलना समय बिताने का एक अच्छा तरीका नहीं लगता है। हालांकि इसके बाद अब हम अगले बिंदु पर आते हैं।

6.     अति करने से बचें। हर रोज उपवास करना या एक ही बार में पूरा क़ुरआन पढ़ना आकर्षक हो सकता है लेकिन पैगंबर मुहम्मद ने हमें अति करने के खिलाफ चेतावनी दी थी। इसलिए 24 घंटे के दिन में खेलने का समय और सीखने का समय अलग-अलग होता है।

“धर्म बहुत आसान है और जो कोई अपने ऊपर धर्म का बोझ डालेगा वह इस तरह आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसलिए आपको अति नहीं करना चाहिए…”[3]

7.     इस्लाम एक समग्र धर्म है; इसके लिए हमें अपने आध्यात्मिक, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिए ऐसी आदतें डालें जो आपको स्वस्थ रखें और आपके इस्लामी चरित्र में योगदान करे। रात में पर्याप्त नींद लेने से आप प्रार्थना करने के लिए सुबह जल्दी उठ सकते हैं। सही मात्रा में सही खाना खाने से आप आलसी की बजाय ऊर्जावान बने रहते हैं; इससे आप बिना किसी कठिनाई के पूजा कर सकते हैं।

8.     मुस्लिम समुदाय में दोस्त बनाने की कोशिश करें। सही तरीके से अल्लाह की पूजा करने वाले लोगों की संगति में रहना फायदेमंद होता है। सबसे अच्छे दोस्त वे हैं जो नए फैशन से ज्यादा इस्लाम के बारे में बात करते हैं। अच्छे दोस्त एक दूसरे को उनके इस्लामी दायित्वों की याद दिलाते हैं, जैसे समय पर प्रार्थना करना या दूसरों की मदद करने का महत्व। 

9.     पैगंबर मुहम्मद के जीवन और समय के बारे में पढ़ने की कोशिश करें। सभी भाषाओं में कई अच्छी किताबें हैं जो अल्लाह के अंतिम दूत के महान जीवन के बारे में सिखाती हैं। मुसलमानों को पैगंबर से प्यार करना चाहिए लेकिन हम किसी ऐसे व्यक्ति से कैसे प्यार करते हैं जिसे हम नहीं जानते।

“तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में उत्तम[ आदर्श है, उसके लिए, जो आशा रखता हो अल्लाह और अन्तिम दिन (प्रलय) की तथा याद करो अल्लाह को अत्यधिक।” (क़ुरआन 33:21)

10. सदाचारी और नैतिक बनें। पैगंबर मुहम्मद, जो उनके आसपास रहते थे और हमारे सभी धर्मी पूर्ववर्तियों जिनमें अल्लाह के सभी पैगंबर शामिल है, उनकी नैतिकता और शिष्टाचार के बारे में जानें और उसका अनुकरण करने का प्रयास करें। अल्लाह हमसे उम्मीद करता है कि हम सबसे अच्छे तरीके से व्यवहार करें, अगर हम कभी-कभी असफल होते हैं तो हमें क्षमा मांगनी चाहिए और बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए।

हमारा धर्म आसान है। यह एक समय में एक छोटा कदम बढ़ाना है। धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से उन आदतों को अपनाएं जो इस दुनिया के जीवन को बेहतर बनाये और आने वाले जीवन को भी बेहतर बनाये।



फुटनोट:

[1] सहीह अल-बुखारी

[2] सहीह मुस्लिम

[3] सहीह अल-बुखारी

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