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प्रार्थना (2 का भाग 2)

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विवरण: छह सबसे महत्वपूर्ण चीज़ें जो अल्लाह से प्रार्थना करते समय नही करनी चाहिए। दुआ मांगने के लिए दस विशेष समय।

द्वारा Imam Mufti (© 2012 IslamReligion.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 19 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 1,153 (दैनिक औसत: 3)


उद्देश्य:

·वह चीज़ों जो अल्लाह से प्रार्थना करते समय नही करनी चाहिए।

·दुआ करने के विशिष्ट समयों को जानना।

अरबी शब्द:

·अज़ान - मुसलमानों को पांच अनिवार्य प्रार्थनाओं के लिए बुलाने का एक इस्लामी तरीका।

·हज - मक्का की तीर्थयात्रा जहां तीर्थयात्री अनुष्ठानों का एक सेट करता है। हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जिसे हर वयस्क मुसलमान को अपने जीवन में कम से कम एक बार अवश्य करना चाहिए यदि वे इसे वहन कर सकते हैं और शारीरिक रूप से सक्षम हैं।

·इक़ामाह - यह शब्द प्रार्थना के दूसरे आह्वान को संदर्भित करता है जो प्रार्थना शुरू होने से ठीक पहले दिया जाता है।

·जिल-हिज्जा - इस्लामी कैलेंडर का बारहवां महीना। यह वह महीना है जिसमें अनिवार्य तीर्थयात्रा की जाती है।

·रमजान - इस्लामी चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना। यह वह महीना है जिसमें अनिवार्य उपवास निर्धारित किया गया है।

दुआ करते समय कौन सी चीज़ें नही करनी चाहिए

1.हद से आगे मत जाओ

इसका मतलब यह है कि अल्लाह से वो चीज़ें मांगना जिन्हें उसने मना किया है। उदाहरण के लिए, जहां किसी से शादी करने के लिए अल्लाह से प्रार्थना करना ठीक है, वहीं अल्लाह से गर्ल फ्रेंड या बॉय फ्रेंड देने या लॉटरी जीतने के लिए कहना मना है।

2.जवाब की आशा नहीं करना

मुसलमान को उम्मीद करनी चाहिए कि अल्लाह उसकी दुआ का जवाब देंगे क्योंकि अल्लाह अपने दासों पर दया करने वाला और उनकी इच्छा को पूरी करने वाला है।

3.दुआ में सिर्फ इस दुनिया की चीजें मांगना

इसके बारे में सोचो, सबसे बड़ा क्या है, यह संसार या परलोक? एक सच्चे आस्तिक को यह पता है कि अल्लाह ने आने वाले जीवन में इस जीवन से भी बड़ा रखा है। इसलिए मुसलमान जो इस बात को समझता है, वह अल्लाह से परलोक का भी आशीर्वाद मांगेगा।

4.अल्लाह को गलत नाम से संबोधित करना

इस सरल नियम को याद रखें: अल्लाह को सिर्फ क़ुरआन या सुन्नत मे निहित नाम से ही संबोधित करें। "बड़ा आदमी" जैसे शब्दों से अल्लाह को संबोधित न करें।

5.अपने या अपने परिवार के खिलाफ दुआ न मांगे और दूसरों को शाप न दें।

यह याद रखने की बात है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति गुस्से में आकर परिवार के किसी सदस्य या यहां तक ​​कि खुद के खिलाफ दुआ मांग सकता है और दूसरे लोगों को कोसना शुरू कर सकता है।

6.अपनी मृत्यु के लिए दुआ न मांगे

आपका जीवन आपके लिए अल्लाह का उपहार है, इसे खत्म करने के लिए अल्लाह से मत पूछो!

पसंदीदा समय जब दुआ के स्वीकार होने की संभावना होती है

दुआ किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन इसके निम्नलिखित समय पर स्वीकार किए जाने की अधिक संभावना है:

1.रात के आखिरी तीसरे हिस्से में दुआ

अल्लाह हमें क़ुरआन में विश्वासिओं का वर्णन करते हुए बताता है,

“और वे भोर के समय अपने पालनहार से क्षमा मांगते हैं।” (क़ुरआन 51:18)

आप रात के आखिरी तीसरे हिस्से की गणना कैसे करेंगे? सूर्यास्त के समय से लेकर फज्र के शुरू होने तक रात होती है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए सूर्यास्त शाम 5 बजे है और अगले दिन फज्र सुबह 5 बजे शुरू होता है। तो रात 12 घंटे की हुई और एक रात का एक तिहाई 4 घंटे होता है। इसके अनुसार रात का आखिरी तीसरा हिस्सा प्रातः 1 बजे से 5 बजे तक होगा।

2.अज़ान के समय दुआ

पैगंबर ने कहा, "जब अज़ान होती हो, तो आसमान के दरवाजे खुल जाते हैं, और दुआ का जवाब दिया जाता है।"(सहीह मुस्लिम)

3.अज़ान और इक़ामा के बीच दुआ

यह दुआ के स्वीकार होने के सबसे अच्छे समय में से एक है जो एक आस्तिक को इस दुनिया और उसके बाद की जरूरतों के लिए अल्लाह से मांगने के लिए दिया जाता है।

4.सज्दा करते हुए दुआ

यह एक उपासक के लिए सबसे अच्छी मुद्रा है क्योंकि यह विनम्रता की पराकाष्ठा है। अल्लाह को यह मुद्रा सबसे ज्यादा प्रिय है। पैगंबर (उन पर अल्लाह की दुआ और आशीर्वाद हो) ने कहा: "एक व्यक्ति अपने ईश्वर के सबसे करीब होता है जब वह सजदा करता है, तो इस समय बहुत अधिक दुआ मांगो।"( सहीह मुस्लिम )

5.औपचारिक प्रार्थना के समापन से पहले दुआ

औपचारिक प्रार्थना के समाप्त होने से पहले, यानी 'अस-सलामु अलैकुम वा-रहमतुल्लाह' कहने से पहले, व्यक्ति इस समय कोई भी दुआ कर सकता है जो उसे पसंद हो क्योंकि यह उन समयों में से एक है जब प्रार्थना का जवाब दिया जाता है।

6.अनिवार्य औपचारिक प्रार्थना के बाद दुआ

यह पूछे जाने पर कि किस समय दुआ का जवाब मिलने की सबसे अधिक संभावना है, पैगंबर ने कहा, "रात के आखिरी हिस्से में और अनिवार्य प्रार्थना के बाद।" (तिर्मिज़ी)

7.शुक्रवार का एक घंटा

पैगंबर मुहम्मद ने कहा: "शुक्रवार को एक घंटे का समय ऐसा होता है, जब कोई मुसलमान उस समय दुआ मांगता है और अल्लाह से कुछ अच्छा मांगता है, तो अल्लाह उसे दे देता है" (साहिह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम)

8.उपवास के महीने, रमज़ान में दुआ

पैगंबर मुहम्मद ने कहा: "जब रमजान आता है, तो दया के दरवाजे खुल जाते हैं और नर्क के दरवाजे बंद हो जाते हैं, और शैतान बंद हो जाते हैं।" (सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम)

9.हज के इस्लामी महीने (जिल-हिज्जा) के पहले दस दिन

इस्लामी महीना जिसमें वार्षिक तीर्थयात्रा या हज किया जाता है, एक धन्य महीना है। पैगंबर ने इस महीने के पहले दस दिनों के बारे में कहा, "इन दस दिनों के मुकाबले ऐसे कोई दिन नहीं हैं जिसमे अल्लाह को अच्छे कर्म अधिक प्रिय हों।" (सहीह अल-बुखारी)

10.बारिश के दौरान

पैगंबर ने कहा, "दो समय ऐसे हैं जब दुआ कभी भी रद्द नही होती: अजान के समय और बारिश के समय की दुआ।" (अबू दाऊद)

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