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नए मुसलमानों के लिए प्रार्थना (2 का भाग 1): प्रार्थना करने से पहले

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विवरण: एक दो-भाग का पाठ जो अनुष्ठान प्रार्थना (नमाज) के बारे मे बताता है, एक मुस्लिम के लिए पूजा का सबसे महत्वपूर्ण रूप। भाग 1: प्रार्थना की तैयारी करना जिसमे शामिल है प्रार्थना के नाम, उनके समय और प्रार्थना की दिशा को जानना।

द्वारा NewMuslims.com

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 18 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 1,362 (दैनिक औसत: 3)


आवश्यक शर्तें

·हाल ही में परिवर्तित हुए लोग कैसे प्रार्थना करें (2 भाग)

उद्देश्य

·प्रार्थना का समय और प्रार्थना करने की दिशा (क़िबला) को जानना।

·अनिवार्य नमाजों के नाम, उनके समय और रकात की संख्या (रकाह) को जानना।

·प्रार्थना (नमाज) के लिए तैयार होने के कुछ बिंदु को सीखना।

अरबी शब्द

·नमाज - आस्तिक और अल्लाह के बीच सीधे संबंध को दर्शाने के लिए अरबी का एक शब्द। अधिक विशेष रूप से, इस्लाम में यह औपचारिक पाँच दैनिक प्रार्थनाओं को संदर्भित करता है और पूजा का सबसे महत्वपूर्ण रूप है।

·रकात - प्रार्थना की इकाई।

·क़िबला : जिस दिशा की और रुख कर के औपचारिक प्रार्थना (नमाज) करी जाती है।

·वूदू - वुज़ू।

·ग़ुस्ल – अनुष्ठान स्नान

·काबा - मक्का शहर में स्थित घन के आकार की एक संरचना। यह एक केंद्र बिंदु है जिसकी ओर सभी मुसलमान प्रार्थना करते समय अपना रुख करते हैं।

·फज्र, जुहर, अस्र, मगरिब, ईशा - इस्लाम में पांच दैनिक प्रार्थनाओं के नाम।

·फर्ज - एक अनिवार्य कर्तव्य।

प्रार्थना का समय

सर्दी और गर्मी के मौसम में प्रार्थना का समय बदल जाता है। आपके पास तीन विकल्प हैं:

(ए) एक धर्मनिष्ठ मुसलमान से पूछें कि नमाज़ का समय क्या है और उन्हें लिख लें। ये समय अगले कुछ दिनों में थोड़ा ही बदलेंगे।

(बी) उन्हें यहां से ऑनलाइन पता करें:

http://www.islamicfinder.org/

आप दुनिया में कहीं भी प्रार्थना (सलाह) का समय पता कर सकते हैं। यह साइट आपके निकटतम मस्जिदों को भी सूचीबद्ध करेगी।

(सी) अधिक संभावना है की आपकी स्थानीय मस्जिद या इस्लामी केंद्र प्रार्थना के समय की एक सारणी प्रिंट करवाते हैं जिसमे मस्जिद में होने वाली सामूहिक प्रार्थनाओं का समय होता है। इसकी प्रति प्राप्त करने के लिए कृपया उनसे संपर्क करें। मस्जिद में एक नए मुसलमान को बहुत जरूरी सहयता भी मिलेगी।

प्रार्थना का नाम

अरबी में

प्रार्थना का नाम

अंग्रेजी में

इकाइयों (रकात) की संख्या

समय

फज्र

भोर की प्रार्थना

2

भोर से सूर्योदय तक

जुहर

दोपहर की प्रार्थना

4

जुहर के समय से लेकर असर शुरू होने तक

अस्र

दोपहर के बाद की प्रार्थना

4

अस्र के समय से लेकर मगरिब शुरू होने तक

मग़रिब

सूर्यास्त की प्रार्थना

3

मगरिब के समय से लेकर ईशा के शुरू होने तक

ईशा

रात की प्रार्थना

4

ईशा के समय से लेकर आधी रात तक। मज़बूरी में, भोर तक पढ़ा जा सकता है

सूची 1 में पांच अनिवार्य (फ़र्ज) दैनिक प्रार्थनाओं के नाम और उनकी इकाइयों (रकात) की संख्या है।

मैं किस दिशा में प्रार्थना करूं?

प्रत्येक प्रार्थना (नमाज) के लिए एक मुसलमान को काबा (मक्का में अल्लाह का पवित्र घर) की दिशा की और रुख करना चाहिए। काबा पहला घर है जिसे मानवता के एक सच्चे ईश्वर की पूजा करने के लिए बनाया गया है। दुनिया भर के सभी मुसलमान इसकी और रुख कर के प्रार्थना करते हैं, दुनिया को अपने पीछे छोड़ कर खुद को अपने पालनहार के लिए समर्पित करते हैं। इस दिशा को क़िबला कहा जाता है और इसका पता लगाना काफी आसान है।

आपके पास प्रार्थना की दिशा (क़िबला) का पता लगाने के लिए कई विकल्प हैं।

(1) किसी साथी मुसलमान से पूछें कि किस दिशा में नमाज़ पढ़नी है।

(2) http://www.islamicfinder.org/ आपको बताएगा कि आपके किस दिशा मे कबा स्थित हैं।

(3) कुछ कलाई घड़ियां बाजार में उपलब्ध हैं जिससे प्रार्थना की दिशा पता करना काफी आसान होता है, खासकर जब कोई नए स्थान पर गया हो या यात्रा कर रहा हो। इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर के मंगाया जा सकता है[1].

प्रार्थना (नमाज़) के लिए तैयार होना

1. एक निश्चित प्रार्थना का समय होने पर हर वयस्क, समझदार मुसलमान पर नमाज़ अनिवार्य है।

2. प्रार्थना के लिए जितने कपड़े पहनने की आवश्यकता है उसे पुरुषों और महिलाओं दोनों को पूरा करना चाहिए।

एक मुस्लिम पुरुष को ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो कम से कम उसे नाभि से घुटने तक ढके और सुनिश्चित करें कि उसके कंधे ढके हुए हैं।

एक मुस्लिम महिला को ढीले कपड़े पहनने चाहिए जो उसके सिर (और कान) और पैरों सहित उसके पूरे शरीर को ढके। उसे अपने हाथ और चेहरे को ढंकने की जरूरत नहीं है।

3. एक मुसलमान को पवित्रता की स्थिति में होना चाहिए, अर्थात व्यक्ति:

·अगर आखिरी बार वुज़ू करने के बाद से गैस, पेशाब, शौच या सोया हो तो उसे वुज़ू करना चाहिए।

·यदि उसको स्वप्नदोष हुआ हो, उसका वीर्य निकला हो, उसने संभोग किया हो, तो उसे ग़ुस्ल (अनुष्ठान स्नान) करना चाहिए। और इसके अलावा एक महिला को मासिक चक्र या प्रसव के बाद का रक्तस्राव समाप्त होने पर ग़ुस्ल (अनुष्ठान स्नान) करना चाहिए।

4. यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कपड़े, शरीर, या उस स्थान पर कोई अशुद्धता न हो जहां वह प्रार्थना करेगा।

5. उसे नमाज़ की दिशा (क़िबला) की ओर रुख करना चाहिए।

6. दिल में नमाज पढ़ने का इरादा करना चाहिए।

7. औपचारिक प्रार्थना (नमाज) अरबी में पढ़ी जानी चाहिए, इसके लिए कृपया 'नए मुसलमानों के लिए प्रार्थना (2 का भाग 2) के अंत में दिए गए अरबी पाठ को पढ़ें। अनुवाद केवल यह जानने के लिए दिया गया है कि आप क्या कह रहे हैं।

(अस्वीकरण: सभी लिंक केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए दिए गए हैं। NewMuslims.com बाहरी वेबसाइटों की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है।)



फुटनोट:

[1] http://www.alfajr.com/en/index.html देखें

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