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भोजन करना – इस्लामी तरीका (2 का भाग 2)

विवरण: भोजन करने का शिष्टाचार। भाग 2।

द्वारा Aisha Stacey (© 2012 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

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श्रेणी: पाठ > इस्लामी जीवन शैली, नैतिकता और व्यवहार > आहार कानून


उद्देश्य

·       इस बात को मानना कि भोजन में आशीर्वाद हैं।

·       खाने के बाद की जाने वाली क्रियाओं सहित कुछ और इस्लामी शिष्टाचार सीखना।

·       इस्लाम में मौखिक स्वच्छता के महत्व को जानना।

·       पानी पीने के इस्लामी शिष्टाचार सीखना।

अरबी शब्द

·       वूदू – वुज़ू।

इससे पहले कि हम "भोजन करना – इस्लामी तरीका" का भाग 2 शुरू करें, आइए हम भाग 1 की अपनी यादों को ताज़ा करें।

·       इस्लाम जीवन जीने का एक समग्र तरीका है।

·       छोटे या बड़े सभी कार्य पूजा के कार्य बन सकते हैं।

·       स्वच्छता महत्वपूर्ण है।

·       सभी कार्यों की शुरुआत ईश्वर का नाम ले कर करें।

·       दाहिने हाथ से खाएं।

·       अच्छे शिष्टाचार दिखाएं।

भोजन में आशीर्वाद

इस्लाम की व्यापकता हमें खाने और पीने के दौरान आशीर्वाद भेजने और प्राप्त करने की अनुमति देती है, हालांकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ईश्वर ने भोजन में ही आशीर्वाद रखा है। पैगंबर मुहम्मद ( उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) ने हमें सलाह दी कि फर्श पर गिरे किसी भी भोजन के टुकड़े को उठाएं, साफ करें और खा लें यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी आशीर्वाद न छूटे या शैतान के लिए भोजन न छूटे।

“जब तुम में से कोई एक निवाला गिराए, तो उसे उठा ले और उसे साफ कर के खा ले, और शैतान के लिये न छोड़े। जब तक कोई अपनी उंगलियां न चाट ले, तब तक किसी को कपड़े से हाथ नहीं पोंछना चाहिए, क्योंकि वह नहीं जानता कि भोजन के किस भाग में आशीर्वाद है।”[1]

और भी अधिक आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए, यदि संभव हो तो एक मुसलमान को अपने भोजन को साझा करने का प्रयास करना चाहिए और अकेले नहीं खाना चाहिए। परिवार, दोस्तों, प्रियजनों और पड़ोसियों के साथ भोजन साझा करना विश्वासियों के बीच बंधन बनाता है। यदि भोजन की मात्रा बहुत कम लगती है, तो यह कभी भी समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि आशीर्वाद आवश्यक भोजन की मात्रा तक होता है।

“दो लोगों का भोजन तीन के लिए पर्याप्त है, और तीन लोगों का भोजन चार के लिए पर्याप्त है।”[2]

“अपना खाना एक साथ खाएं, क्योंकि जब आप एक साथ खाते हो तो और भी आशीषें मिलती हैं।”[3]

संयम से खाना

भोजन करने के शिष्टाचार में संयम में भोजन करना भी शामिल है और भोजन कितना भी स्वादिष्ट क्यों न हो, अधिक मात्रा मे नहीं खाना चाहिए। पैगंबर मुहम्मद ने हमें बताया कि शरीर को हल्का और स्वस्थ रखना अधिक वजन, आलसी और निष्क्रिय होने से बेहतर है।

“मनुष्य अपने पेट से बदतर कोई बर्तन नहीं भरता। आदम के बेटे के लिए इतना खाना काफी है जितना उसके शरीर के लिए पर्याप्त हो। परन्तु यदि वह इससे अधिक खाता है, तो एक तिहाई भोजन के लिये, एक तिहाई पानी के लिये और एक तिहाई वायु के लिये रखे।”[4]

“खाओ-पिओ और फिजूलखर्ची न करो। वस्तुतः, वह (अल्लाह) फिजूलखर्ची करने वालों से प्रेम नहीं करता।” (क़ुरआन 7:31)

पैगंबर मुहम्मद की सुन्नत से, हमें चांदी या सोने के बर्तन से खाना-पीना नहीं चाहिए।

“रेशम न पहनो, और न सोने और चांदी के बर्तन से खाओ-पीओ। ये सब इस दुनिया में उनके (अविश्वासियों के) लिए हैं और हमारे लिए परलोक में।”[5]

खाने के बाद

भाग 1 में हमने भोजन करने से पहले ईश्वर का नाम लेना सीखा और अब हम भोजन समाप्त करने के बाद ईश्वर की महिमा के अनुरूप उसकी स्तुति और धन्यवाद करना सीखेंगे। हम अल्हम्दुलिल्लाह (सभी प्रशंसा और धन्यवाद अल्लाह के लिए है) कहते हैं यह स्वीकार करने के लिए कि ईश्वर वह है जो हमारी सभी जीविका प्रदान करता है। चाहे वह थोड़ा हो या बहुत, हम उसका धन्यवाद करते हैं और उसकी स्तुति करते हैं।

“और धरती में कोई चलने वाला नहीं है, परन्तु उसकी जीविका अल्लाह के ऊपर है” (क़ुरआन 11:6)

पैगंबर मुहम्मद ने कहा कि "ईश्वर प्रसन्न होता है जब उनका कोई दास कुछ खाता है और उसके लिए ईश्वर की प्रशंसा करता है, या कुछ पीता है और उसके लिए ईश्वर की प्रशंसा करता है,[6] और यही एक सच्चा आस्तिक हासिल करने की कोशिश करता है; अपने सभी कार्यों में ईश्वर को खुश करने की कोशिश।

पैगंबर मुहम्मद ने हम सभी को खाने से पहले और बाद में हाथ धोने की सलाह दी, भले ही हम धार्मिक पवित्रता की स्थिति में हों या नहीं। पानी से हांथ धोना स्वीकार्य है, लेकिन साबुन या साफ़ करने वाले लिक्विड का उपयोग करना बेहतर है। खाने के बाद कुल्ला करने की भी सलाह दी जाती है।

एक बार एक अभियान पर पैगंबर मुहम्मद ने दोपहर की नमाज पढ़ाई और फिर भोजन मांगा। खाना लाया गया और सभी ने खाया। फिर शाम की नमाज का समय हुआ, पैगंबर मुहम्मद उठे, पानी से कुल्ला किया, और वैसा ही उनके साथियों ने भी किया। फिर उन्होंने वुज़ू किये बिना नमाज पढ़ी।[7]

इस वृत्तांत से हमें दो बातें पता चलती हैं, कि खाने के बाद कुल्ला करना बेहतर है और यह कि भोजन करने से (बहुत विशिष्ट परिस्थितियों को छोड़कर) व्यक्ति का वुज़ू नहीं टूटता।

मौखिक स्वच्छता

हालांकि खाने के बाद दांत साफ करना अनिवार्य नहीं है, इस्लाम मौखिक स्वच्छता को बहुत महत्व देता है। पैगंबर मुहम्मद ने एक टूथ स्टिक का उपयोग करने की सलाह दी जिसे मिस्वाक या सिवाक कहा जाता है। उन्होंने हमें बताया कि यह मुंह को शुद्ध करता है और ईश्वर को प्रसन्न करता है। मिस्वाक एक प्राकृतिक टहनी है; यह दांतों को साफ करती है, मसूड़ों से खून बहने से रोकती है, बैक्टीरिया को मारती है और सांस को ताजा करती है। यदि मिस्वाक उपलब्ध नहीं है तो कोई टूथब्रश, टूथपेस्ट और माउथ वॉश का उपयोग कर सकता है क्योंकि वे स्वीकार्य हैं। पैगंबर (उन पर अल्लाह की दया और आशीर्वाद हो) ने कहा:

“मिस्वाक का प्रयोग करो, क्योंकि यह मुंह को शुद्ध करता है और ईश्वर को प्रसन्न करता है। अगर यह मेरी उम्मत (राष्ट्र) के लिए बहुत कठिन न होता, तो मैं उन्हें हर नमाज़ से पहले मिस्वाक करने की आज्ञा देता।” [8]

पैगंबर मुहम्मद ने विश्वासियों को पानी पीने के तरीके भी सुझाए। उन्होंने सलाह दी कि पानी को एक बार में पीने के बजाय तीन सांसों में पानी पीना चाहिए, और पीने के बर्तन में सांस नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह पानी को दूषित करता है। और बैठ कर पानी पीना ही अच्छा है।

अंत में, जैसा कि हमने बताया है, इस्लाम जीवन जीने का एक संपूर्ण तरीका है; यहां तक ​​कि खाने या पीने जैसे सांसारिक कार्यों को भी ईश्वर की पूजा करने का एक बड़ा मौका माना जा सकता है।



फुटनोट:

[1] सहीह मुस्लिम

[2] सहीह अल बुखारी

[3] अबू दाऊदअत-तिर्मिज़ी

[4] इब्न माज़ा

[5] सहीह अल बुखारीसहीह मुस्लिम

[6] सहीह मुस्लिम

[7] सहीह अल बुखारी

[8] इबिद

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