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इस्लाम मे सोशल मीडिया

विवरण: यह पाठ आधुनिक युग में सोशल मीडिया के उपयोग और मुसलमानों के लिए कुछ दिशानिर्देशों पर प्रकाश डालता है।

द्वारा Imam Mufti (© 2015 NewMuslims.com)

प्रकाशित हुआ 08 Nov 2022 - अंतिम बार संशोधित 07 Nov 2022

प्रिंट किया गया: 0 - ईमेल भेजा गया: 0 - देखा गया: 156 (दैनिक औसत: 2)

श्रेणी: पाठ > सामाजिक बातचीत > मुस्लिम समुदाय


उद्देश्य

·       सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान का सामान्य ज्ञान प्राप्त करना।

·       सोशल मीडिया का लाभ उठाने के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव सीखना।

·       सोशल मीडिया का उपयोग करते समय सावधानी बरतने के पांच क्षेत्रों के बारे मे जानना।

अरबी शब्द

·       इमाम - नमाज़ पढ़ाने वाला।

·       उम्रह - सऊदी अरब के मक्का शहर में अल्लाह के पवित्र घर की तीर्थयात्रा। अक्सर इसे छोटी तीर्थयात्रा के रूप में जाना जाता है। इसे वर्ष के किसी भी समय किया जा सकता है।

परिचय

socialmedia.jpgजनवरी 2014 तक 74% अमेरिकी वयस्क ऑनलाइन सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, लिंक्डइन और पिंट्रेस्ट का उपयोग करते थे, 2008 में ये 26% था।[1]  ऐसी सोशल मीडिया साइटों पर उपयोगकर्ता अपनी प्रोफाइल बना सकते हैं, दूसरों के साथ संवाद कर सकते हैं, विचारों और योजनाओं को साझा कर सकते हैं, संगीत, फोटो, वीडियो और बहुत कुछ कर सकते हैं।

सोशल मीडिया का प्रभाव जीवन के सभी पहलुओं में रहा है: पारस्परिक संबंध, शिक्षा, व्यवसाय, धर्म, सामाजिक आंदोलन और राजनीति।

इतिहास

4 अक्टूबर 2012 को फेसबुक पर दुनिया भर में एक अरब मासिक उपयोगकर्ता हो गए थे, पृथ्वी के हर सात लोगों में से एक इसका सदस्य था जिससे यह सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट बन गया।[2] संयुक्त राज्य अमेरिका में 71% ऑनलाइन वयस्क फेसबुक का उपयोग करते हैं। फेसबुक हर दिन 4.5 बिलियन "लाइक", 4.75 बिलियन कंटेंट शेयर और 300 मिलियन से अधिक फोटो अपलोड का प्रबंधन करता है।[3] सितंबर 2014 तक, 51% अमेरिकी वयस्क यूट्यूब का उपयोग कर रहे थे, 28% पिंट्रेस्ट का उपयोग कर रहे थे, 28% लिंक्डइन का उपयोग कर रहे थे, 26% इंस्टाग्राम का उपयोग कर रहे थे, और 23% ट्विटर का उपयोग कर रहे थे।[4]  ट्विटर के 288 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और 500 मिलियन से अधिक ट्वीट प्रतिदिन किये जाते हैं।[5] ऑनलाइन वयस्कों में, एक से अधिक सोशल नेटवर्किंग साइट का उपयोग करने वालो की संख्या 2013 में 42% से बढ़कर 2014 में 52% हो गई थी।

मुसलमानों के लिए सोशल मीडिया

मुसलमान होने के नाते हमारा मिशन इस्लाम सीखना, इसको व्यवहार मे लाना और इस्लाम का संदेश फैलाना है। हमें अपने समय का बुद्धिमानी से उपयोग करने और पाप से दूर रहने की आवश्यकता है। जहां तक ​​इस्लाम का संदेश देने का सवाल है, हमें इस खूबसूरत संदेश को पहुंचाने के लिए जो कुछ भी हमारे पास है, उसका इस्तेमाल करना चाहिए।

इस्लाम सोशल मीडिया के इस्तेमाल को नियंत्रित करता है, जिसे चाकू के इस्तेमाल के दृष्टांत से समझा जा सकता है। आप चाकू का उपयोग खाना पकाने या किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए कर सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसका उपयोग कैसे करते हैं। इसी तरह सोशल मीडिया का भी समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आप इससे अच्छाई लें और जो आपके लिए फायदेमंद न हो उसे छोड़ दें।

पत्रिकाएं, इंटरनेट फ़ोरम, ब्लॉग, विकिपीडिआ, सोशल नेटवर्क, पॉडकास्ट, किताबें और बहुत सी अन्य चीज़ें हैं जिन तक हमारी पहुंच है। हालांकि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम उनका सही तरीके से उपयोग करें।

उदाहरण के लिए, आप फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर कई विद्वानों और ज्ञान के छात्रों से जुड़ सकते हैं और बहुत लाभ उठा सकते हैं। आप दूर के परिवार के सदस्यों और दोस्तों के संपर्क में रह सकते हैं। आप लिंक्डइन के माध्यम से अपने पेशेवर संपर्कों के साथ भी नेटवर्क बना सकते हैं। सुनिश्चित करें कि आपके ऑनलाइन मित्र वे लोग हो जो आपको अच्छाई की याद दिलाते हैं और जो आपके लिए बुरा है उससे आपको दूर करते हैं।

सोशल मीडिया पर सावधानी के साथ चलें

1. सोशल मीडिया अविश्वसनीय और झूठी जानकारी के प्रसार को सक्षम बनाता है।

49.1% लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए झूठी खबरें सुनी हैं।[6]

2. सोशल नेटवर्किंग साइट्स तनाव और ऑफलाइन संबंध मे समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग बिजनेस स्कूल के एक अध्ययन में पाया गया कि एक व्यक्ति के जितने अधिक फेसबुक मित्र होते हैं, वह फेसबुक का उपयोग करने मे उतना ही अधिक तनावपूर्ण महसूस करता है।[7] 9 फरवरी 2012 की प्यू इंटरनेट रिपोर्ट के अनुसार, 15% वयस्क सोशल नेटवर्क उपयोगकर्ताओं को सोशल नेटवर्किंग साइट पर कुछ ऐसा अनुभव हुआ जिसके कारण उनकी दोस्ती समाप्त हो गई, 12% वयस्क उपयोगकर्ताओं को ऐसा ऑनलाइन अनुभव हुआ जिसके परिणामस्वरूप आमने-सामने उनकी बहस हो गई, और 3% वयस्कों ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर ऐसा अनुभव किया जिसके परिणामस्वरूप उन्हें शारीरिक टकराव का सामना करना पड़ा।

3. सोशल नेटवर्किंग साइट्स लोगों को समय बर्बाद करने के लिए लुभाती हैं।

8 से 18 साल की आयु के 40% बच्चे रोजाना 54 मिनट सोशल मीडिया साइट्स पर बिताते हैं।[8]  सर्वेक्षण किये गए 36% लोगों ने सोशल नेटवर्किंग को "समय की सबसे बड़ी बर्बादी" बताया, 25% लोगो ने काल्पनिक खेल को, 23% लोगो ने टीवी देखने को और 9% लोगो ने खरीदारी [9] 42% अमेरिकी इंटरनेट उपयोगकर्ता सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर फार्मविल या माफिया वार्स जैसे गेम खेलते हैं।

4. इंटरनेट आधारित सोशल नेटवर्किंग से व्यक्तित्व और मस्तिष्क संबंधी विकार हो सकते हैं।

सोशल नेटवर्किंग साइटों का उपयोग व्यक्तित्व और मस्तिष्क विकारों से संबंधित है, जैसे कि व्यक्तिगत बातचीत करने में असमर्थता, तत्काल संतुष्टि की आवश्यकता, एडीएचडी, और आत्म-केंद्रित व्यक्तित्व, इसके साथ ही व्यसनी व्यवहार।[10]

पैथोलॉजिकल इंटरनेट उपयोग (सोशल नेटवर्किंग के उपयोग के कारण) अकेलापन, अवसाद, चिंता और सामान्य संकट की भावनाओं से जुड़ा है।[11] 2013 का डायग्नोस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैन्युअल ऑफ़ मेन्टल डिसऑर्डर्स (डीएसएम) "इंटरनेट व्यसन विकार" का मूल्यांकन कर रहा है। 2008 में यूसीएलए के एक अध्ययन से पता चला कि मूल रूप से वेब उपयोगकर्ताओं का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स[12]  बदल गया है, जो आंशिक रूप से सोशल नेटवर्किंग साइटों की तेज गति के कारण मस्तिष्क को बार-बार एक्सपोजर के साथ रीवायर कर रहा था।

5. सोशल नेटवर्किंग साइट्स "सेक्सटिंग" को सक्षम बनाती हैं, जिससे आपराधिक आरोप लग सकते हैं और व्यक्तिगत छवियों का अप्रत्याशित प्रसार हो सकता है।

कभी सिर्फ सेल फोन मैसेज तक सीमित रहने तक, "सेक्सटिंग" सोशल मीडिया में स्थानांतरित हो गया है, जिसमे किशोर अपनी या दूसरों की जोखिम भरी तस्वीरें पोस्ट करते हैं या मैसेजिंग के माध्यम से भेजते हैं। 2008 और 2009 में, अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने युवाओं द्वारा बनाई गई यौन छवियों के 3,477 मामले देखे, जिनमें से 2,291 एजेंसियों ने कम से कम एक मामले को देखा।[13]  परिणामस्वरूप, किशोर और वयस्कों पर बाल पोर्नोग्राफ़ी रखने और वितरित करने का आरोप लगाया जा रहा है, भले ही किशोर ने सिर्फ अपनी एक तस्वीर ली और वितरित की हो।[14] सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई 88% निजी स्व-निर्मित यौन छवियां पोर्नोग्राफ़ी वेबसाइटों द्वारा चुरा ली जाती है और लोगो मे फैला दी जाती है, अक्सर व्यक्ति की जानकारी के बिना।[15]

6. सेलिब्रिटी कल्चर से सावधान रहें।

सेलिब्रिटी संस्कृति से बहुत अधिक मोहित होने से सावधान रहें। हां, दुख की बात है कि मुसलमान सेलिब्रिटी विद्वानों से मोहित हैं! विद्वान के लिए प्रसिद्धि उतनी ही जहर है जितनी किसी और के लिए। कोई व्यक्ति ऑनलाइन कितना प्रसिद्ध दिखता है, यह इस बात का आश्वासन नहीं है कि वे जो पढ़ा रहे हैं वह सही है। सेलिब्रिटी "शेख" आपके स्थानीय इमाम या विद्वान से सीखने का विकल्प नहीं है। आप एक ऑनलाइन शेख से शिष्टाचार कभी नहीं सीख सकते। यदि आपका पसंदीदा शेख हमेशा पोस्ट करता है कि वह क्या खा रहा है, वह कहां जा रहा है, और अपने प्रशंसकों से यह बताने के लिए कहता है कि वो अपनी उम्रह यात्रा के दौरान उनके लिए क्या प्रार्थना करे, तो इस्लामी मार्गदर्शन के लिए कहीं और जाएं।



फुटनोट:

[1] कीथ हैम्पटन, लॉरेन सेशंस गौलेट, ली रेनी, और क्रिस्टन परसेल, "सोशल नेटवर्किंग साइट्स एंड आवर लाइव्स,," www.pewinternet.org, 16 जून 2011

प्यू रिसर्च सेंटर, "सोशल नेटवर्किंग फैक्ट शीट,," pewinternet.org (24 मार्च 2015 को एक्सेस किया गया)

[2] आरोन स्मिथ, लॉरी सेगल और स्टेसी काउली, "फेसबुक रीचेस वन बिलियन यूजर्स," www.cnnmoney.com, 4 अक्टूबर 2012

[3] ज़ेफोरिया, "द टॉप 20 वैल्यूएबल फेसबुक स्टैटिस्टिक्स," zephoria.com, फरवरी 2015

[4] मेव दुग्गन, निकोल बी. एलिसन, क्लिफ लेम्प, अमांडा लेनहार्ट और मैरी मैडेन, "सोशल मीडिया अपडेट 2014," pewinternet.org, 9 जनवरी 2015

[5] ट्विटर, "अबाउट," twitter.com (24 मार्च 2015 को एक्सेस किया गया)

[6] क्रिस्टिन मैरिनो, "सोशल मीडिया: द न्यू न्यूज सोर्स," www.schools.com, 16 अप्रैल 2012

[7] डेविड गुटिरेज़, "फेसबुक इज़ मेकिंग यू मिजरेबल, साइंटिस्ट्स फाइंड," www.naturalnews.com, 29 नवंबर 2012

[8] विक्टोरिया जे. राइडआउट, उल्ला जी. फ़ोहर, और डोनाल्ड एफ. रॉबर्ट्स, "जनरेशन एम2एल मीडिया इन द लाइव्स ऑफ़ 8- टू 18-ईयर-ओल्ड्स," www.kff.org, जनवरी 2010

[9] मार्क डॉलिवर, "सोशल नेटवर्किंग: ए वेस्ट ऑफ टाइम?," www.adweek.com, 7 अक्टूबर 2010

[10] ConsumerReports.org, "फेसबुक एंड योर प्राइवेसी: हु सीस दी डाटा यू शेयर ऑन दी बिगेस्ट सोशल नेटवर्क," उपभोक्ता रिपोर्ट, जून 2012

[11] के. वोल्फिंग, एम.ई. बीयूटेल, और के.डब्ल्यू. मुलर, "कंस्ट्रक्शन ऑफ़ ए स्टैंडर्डाइज़्ड क्लीनिकल इंटरव्यू टू असेस इंटरनेट एडिक्शन: फर्स्ट फाइंडिंग रिगार्डिंग दी यूज़फुलनेस ऑफ़ एआईसीए-सी," जर्नल ऑफ एडिक्शन रिसर्च एंड थेरेपी, 2012

[12] टोनी डोकोपिल, "इज़ द ऑनस्लॉट मेकिंग अस क्रेजी?,"न्यूज़वीक, 16 जुलाई 2012

[13] जेनिस वोलक, डेविड फिंकेलहोर, और किम्बर्ली जे. मिशेल, "हाउ ऑफन आर टीन्स अरेस्टेड फॉर सेक्सटिंग? पुलिस मामलों के एक राष्ट्रीय नमूने से डेटा," बाल रोग , जनवरी 2012

[14] नैन्सी वी. गिफोर्ड, "सेक्सटिंग इन द यूएसए," www.fosi.org (6 दिसंबर 2012 को एक्सेस किया गया)

[15] बेन वेइट्सेंकोर्न, "प्राइवेट पोर्न पिक्स आर नॉट प्राइवेट फॉर लॉन्ग," www.nbcnews.com, अक्टूबर 2012

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